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भारी मात्रा में चोरी का विद्युत तार बरामद, दो गिरफ्तार

Tue, 30 Dec 2014 12:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
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कानपुर से सैनी तक रेलवे ओएचई तार (रेल लाइन के ऊपर लगा हाई वोल्टेज बिजली का तार) काटने वाला बड़ा रैकेट सक्रिय है। दो साल के भीतर कानपुर से नैनी तक बिछाई जा रही 132 केवी रेलवे की ट्रांसमिशन लाइन का कई जगह से एक करोड़ से ज्यादा कीमत का तार चोरी हो चुका है।
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फतेहपुर से सैनी (इलाहाबाद) तक कई थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई पर जीआरपी और आरपीएफ अभी तक एक भी तार कटर को नहीं गिरफ्तार कर सकी हैं। लगातार हो रही तार कटिंग की वारदात से परेशान ठेका लेने वाली कंपनी को अपनी पेट्रोलिंग टीम को लगाना पड़ा।

टीम ने रविवार रात रसूलाबाद से सिराथू के बीच तार चुरा रहे दो युवकों को रंगे हाथ दबोच लिया। वहीं उसके तीन-चार साथी भागने में सफल रहे। टीम ने मौके से करीब डेढ़ लाख रुपये का तार और वारदात में प्रयुक्त एक जाइलो गाड़ी बरामद की है। बरामद गाड़ी कल्याणपुर (कानपुर) के मसवानपुर में रहने वाले एक शख्स की बताई गई है।
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बिजली की 24 घंटे उपलब्धता के मामले में रेलवे को आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से मंत्रालय ने वर्ष 2010 में 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन फॉर रेलवे सप्लाई नाम से प्रोजेक्ट तैयार किया था।

इसके तहत 132 केवी रेलवे ट्रांसमिशन लाइन बिछाने काम चल रहा है। 132 केवी को जगह-जगह बन रहे सबस्टेशन पर लगे ट्रांसफार्मर केजरिए 25 किलो वॉट में तब्दील करके ट्रेनों में सप्लाई किया जाएगा।

इसके पीछे रेलवे अफसरों का कहना है कि अभी तक रेलवे को यूपीपीसीएल से पॉवर सप्लाई मिल रही है। कभी-कभी सप्लाई बंद होने से रेल संचालन प्रभावित हो जाता है। इसके समाधान स्वरूप एनटीपीसी से बिजली सप्लाई लेने का करार हो चुका है।
इसी योजना के तहत दिल्ली-हावड़ा रेलवे लाइन पर कानपुर से नैनी तक ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का काम चल रहा है। यह काम वर्ष 2010 में शुरू हुआ था। मार्च 2015 तक पूरा किया जाना है।

लाइन बिछाने और सबस्टेशन बनाने का ठेका हैदराबाद की रामचंद्रन राव ट्रांसमिशन एंड प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड को मिला है। इसकी लागत करीब 60 करोड़ रुपये है। अब तक दो फेज का काम हो चुका है।

सरसौल और मलावां के बीच बिजली की सप्लाई चालू हो चुकी है। मलावां-रसूलाबाद के मध्य बिजली सप्लाई चालू होनी है। तीसरे फेज में रसूलाबाद से सिराथू के बीच लाइन बिछाने और सबस्टेशन बनाने का काम जोरों पर है।
रेलवे के अफसरों के मुताबिक रेल लाइन के ऊपर लगे हाई वोल्टेज बिजली के तार काटने वाले गैंग कानपुर से सैनी के बीच सक्रिय है। विगत दो वर्षो में कानपुर से सैनी के बीच तार कटर एक करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत का तार पार कर चुके है। फतेहपुर के खागा, मलवां, कल्याणपुर, सैनी समेत कई थानों में एफआईआर दर्ज कराई गईं।

जीआरपी, आरपीएफ को भी घटना की सूचना लिखित और मौखिक रूप से दी गई। इसके बाद भी आज तक जीआरपी और आरपीएफ ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। इधर, लगातार हो रही तार चोरी की घटनाओं से ठेका लेने वाली कंपनी भी परेशान हो गई। कंपनी को खुद अपनी पेट्रोलिंग टीम को फील्ड पर उतारना पड़ा।

यह टीम रात में निधार्रित क्षेत्र में पेट्रोलिंग करती है। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर मोहम्मद जैकी ने बताया कि रविवार रात  रसूलाबाद से सिराथू केबीच टॉवर नंहर 25 से 26 के बीच दो कंडेक्टर का तार चोरों ने काट लिया। चोर तार को जाइलो कार पर लाद रहे थे तभी पेट्रोलिंग टीम वहां पहुंच गई। टीम को देखते ही तार कटर जाइलो छोड़कर भाग निकले। टीम ने दो चोरों को दबोच लिया। जबकि उसकेतीन-चार साथी भाग निकले। टीम ने काटा गया तार और जाइलो गाड़ी कब्जे में ले ली। इसके बाद चोरों, बरामद तार और गाड़ी खागा पुलिस को सौंप दिया।

पुलिस के मुताबिक बरामद जाइलो कल्याणपुर के मसवानपुर निवासी राजेश कुमार के नाम है। इससे जाहिर होता है कि तार कटर गैंग के तार कानपुर से जुड़े हैं। फरार अभियुक्तों में कानपुर और आसपास के जिलों को रहने वाले बताए गए हैं। एसओ खागा विष्णु पाल सिंह ने बताया कि कंपनी के मेड सैनी कौशांबी निवासी शिव गोविंद की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ तार चोरी की एफआईआर दर्ज की गई है। एसओ ने किसी चोर और वारदात में प्रयुक्त गाड़ी पकड़े जाने से इनकार किया है। एसओ का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही वारदात में परोक्ष और अपरोक्ष रूप शामिल लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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जाइलो में लगा है हूटर
तार कटर से बरामद जाइलो में हूटर लगा है। पकड़े गए चोर का कहना है कि रात में गैंग वारदात को अंजाम देने निकलता है तो जाइलो का हूटर बजाया जाता है। ताकि किसी को शक न हो कि लग्जरी गाड़ी जाइलो में चोरों की बारात जा रही है।
37 लेयर का होता है तार
ओईएच में प्रयोग होने वाला तार 37 लेयर का होता है। इनमें 30 लेयर एल्युमोनियम और सात लेयर स्टील की होती है। यह तार काफी कीमती है। रेलवे अफसरों का कहना है कि तार का कीमती होने की बात दीगर है। अचानक तार कटने से रेल संचालन प्रभावित हो जाता है। इस वजह से आम लोगों को काफी परेशानी होती है। पर, जीआरपी, आरपीएफ और सिविल पुलिस तार काटने वालों को पकड़ने में दिलचस्पी नहीं लेती है। जबकि यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

एसओ का बयान:
तार कटर गैंग से जुड़े लोगों का पता लगाने के लिए कानपुर पुलिस की भी मदद ली जाएगी। अभियुक्तों का पता लगाकर उनके घरों और संभावित  ठिकानों पर छापेमारी के दौरान स्थानीय पुलिस का सहयोग लिया जाएगा। तार कटर गैंग के तार और कहां-कहां फैले हैं और कौन लोग शामिल हैं। इस बारे में भी छानबीन चल रही है।
विष्णु पाल सिंह एसओ खागा फतेहपुर

गुडवर्क का श्रेय लेने की कोशिश
कंपनी की पेट्रोलिंग टीम ने चोरों को पकड़ा। चुराया गया तार और वारदात में प्रयुक्त जाइलो गाड़ी बरामद कर खागा पुलिस को सौंप दी। अब खागा पुलिस पेट्रोलिंग टीम के गुडवर्क को अपने खाते में लाने की कवायद में लगी है। यहीं वजह है कि एसओ देर रात तार कटरों के पकड़े जाने और जाइलो के बरामद होने की पुष्टि करने से बचते रहे।
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