किशनपुर। फिलीपींस की जेल में पांच साल से बंद मृगेंद्र सिंह को छुड़ाने परिवार के लोग दौड़ भाग कर रहे हैं। परिवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से आस है कि वह चाह लेंगी तो उनका लाल घर लौट सकेगा।
मृगेंद्र सिंह के पिता अर्जुन सिंह अधिवक्ता हैं। परिवार चार साल पहले शहर के कटरा अब्दुल गनी मुहल्ले में किराये पर रहता था। अब परिवार किशनपुर के रौताना मुहल्ले में पैतृक गांव में रह रहा है। चाचा करन सिंह की मानें तो परिवार भारतीय दूतावास तक गुहार लगा चुका है। मृगेंद्र 10 साल पहले घर से पायलट बनने का सपना संजोकर्र निकला था। विदेश में कामर्शियल पायलट का प्रशिक्षण डिसकलर में फेल होने की वजह से अधूरा रह गया। परिवार के करीब 15 से 20 लाख रुपये खर्च हो चुके थे। यही पैसा डूबने से बचाने के लिए मृगेंद्र इंस्टीट्यूट में रकम वापस मांगने गया तो उसे आरोप है कि झूठे जानलेवा हमले के केस में जेल में बंद करा दिया गया। मृगेंद्र की मां मनोरमा व पिता तीन साल पहले फिलीपींस पहुंचे भी। बेटे को जेल में देखा लेकिन छुड़ा नहीं सके। अब दो साल से उन्हें बेटे के बारे में कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है।
अमर उजाला ने सोमवार को विदेश पन्ने में ‘ विदेश मंत्री सुषमा से लगाई बेटे को बचाने की गुहार’ शीर्षक से प्रकाशित खबर पढ़ने के बाद किशनपुर कस्बे के रौताना मोहल्ला में रहने वाले मृगेंद्र के न केवल परिवार के लोग बल्कि पास पड़ोस के लोग उसकी घर वापसी की ईश्वर से प्रार्थना करने लगे। पिता अर्जुन ने मृगेंद्र व छोटे बेटे सोनू की बेहतर तालीम के लिए ही पत्नी मनोरमा को शहर के कटरा अब्दुलगनी में किराये का मकान ले रखा था। मृगेंद्र के बाहर जाने और सोनू के लखनऊ की लखनऊ में जॉब लग जाने के बाद वह फिर गांव लौट आए। मृगेंद्र के चाचा करन सिंह ने बताया कि पूरा परिवार चाहता है कि कितनी जल्दी मृगेंद्र सकुशल घर लौट आए।