फतेहपुर। खखरेरू थाना क्षेत्र में एक महिला ने बुधवार रात लगभग 12 बजे अपने दो मासूम बच्चों को चारपाई से बांधकर केरोसिन उड़ेल आग लगा ली। बच्चों की घर में ही और महिला की अस्पताल में मौत हो गई। हालांकि पति भी झुलसा है। मायके पक्ष के लोगों ने गुरुवार सुबह पति के घर हंगामा काटा। पुलिस ने किसी तरह से उन्हें शांत कराया। तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। सीएचसी में महिला ने बयान दिए हैं।
खखरेरू थाने के अढैया गांव निवासी हुबलाल की बेटी कविता (28) की शादी दस साल पहले पड़ोसी गांव परवेजपुर निवासी नरेंद्र कुमार से हुई थी। एक बेटा कार्तिक (6) और बेटी कृतिका (आठ माह) थी। पति ने बताया कि आंगन में सास गीता और बरामदे में वह और छोटा भाई धर्मेंद्र सो रहे थे। अचानक कविता की चीख सुनाई देने पर परिवार की नींद खुली। दरवाजा तोड़कर कोठरी में घुसे तो कविता और बच्चे जल रहे थे। शोर सुन ग्रामीणों की भीड़ भी इकट्ठा हो गई। सूचना पर परवेजपुर चौकी से पुलिस पहुंची। कड़े प्रयास के बाद आग बुझाई गई। कविता और कार्तिक को घर के बाहर लाया गया। आठ माह की बच्ची चारपाई के नीचे मिली। तीनों को हरदों सीएचसी लेकर पहुंचे। वहां, डाक्टरों ने बच्चों को मृत घोषित किया। नायब तहसीलदार व पुलिस ने कविता के बयान लिए। उसकी हालत नाजुक देखकर जिला अस्पताल को रेफर किया। यहां सुबह लगभग साढ़े पांच बजे महिला पहुंची। डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना पर मायके से परिजन परवेजपुर पहुंचे। परिजनों ने हंगामा काटा और प्रताड़ना का आरोप लगाया। कहा कि षड्यंत्र कर कविता और उसके बच्चों को जला दिया गया है। पुलिस मौके पर पहुंची, तब वह लोग शांत हुए।
थानेदार सच्चिदानंद त्रिपाठी ने बताया कि महिला ने बयान में कहा है कि उसने घरेलू मामलों को लेकर पति से झगड़ा होने पर बच्चों के साथ आग लगाई है। थानेदार ने बताया कि विवाद किस बात का था इसके बारे में वह जानकारी नहीं दे सकी।
मायके में रहने की जिद पर अड़ी थी कविता
फतेहपुर। बच्चों संग आग लगा लेने की घटना के पीछे कविता के परिवार से अलग रहने की जिद सामने आई है। इसे लेकर कुछ दिनों से दंपति में विवाद हो रहा था। वह मायके में रहना चाहती थी। पति के तैयार न होने के कारण आए दिन विवाद होता था।
कविता का मूल रूप से मायका खखरेरू थाना क्षेत्र के अढैया है। उसके पिता हुबलाल को अपनी ससुराल कौशांबी के अजुहा में जायदाद मिली है। कविता की शादी पड़ोस के गांव परवेजपुर के नरेंद्र कुमार से थी। शादी के दस साल बीत चुके हैं। नरेंद्र सूरत में नौकरी करता है। वहीं, नरेंद्र के पिता गया प्रसाद छोटे बेटे धर्मेंद्र के साथ लुधियाना में प्राइवेट नौकरी करते हैं। तीन माह से नरेंद्र वापस काम पर नहीं गया। नरेंद्र गांव आने के बाद पत्नी को अजुहा से परवेजपुर लाया था। ससुराल में नरेंद्र की दादी रमदेहया की हालत ठीक नहीं रहती है। सारा काम कविता को देखना पड़ता था। वह नरेंद्र पर अजुहा में रहने का दबाव बना रही थी। ससुरालीजन घटना में यही वजह मान रहे हैं। देवर धर्मेंद्र दस दिन पहले लुधियाना से आया है। महिला ने पुलिस को दिए बयान में केवल पति से घरेलू बातों को लेकर झगड़ा होना बताया है।
कयास लगाए जा रहे हैं कि कुछ दिनों से दंपति के बीच विवाद बढ़ गया था। तनाव में आकर आत्मघाती कदम उठाया गया। उधर, मायके पक्ष से आए परिजन परवेजपुर गांव में काफी गुस्से में नजर आए। उन्होंने ससुरालीजनों पर एफआईआर के लिए तहरीर तैयार की, लेकिन थाने देने नहीं पहुंचे। अचानक गुस्सा शांत होना भी किसी के गले नहीं उतर रहा है।
सीओ श्रीपाल यादव ने बताया कि विवाद की जांच की जा रही है। अंतिम संस्कार होने के बाद परिवार से बातचीत की जाएगी। इधर, पुलिस अधीक्षक राहुल राज मुर्दाघर पहुंचे। उसके बाद घटनास्थल में छानबीन की। उन्होंने परिवार के लोगों और ग्रामीणों से भी बातचीत की।
दादी बेसुध
मासूम कार्तिक और कृतिका के शवों के पास उनकी दादी गीता देवी बदहवास हालत में पड़ी रहीं। पुलिस, बच्चों के शवों को सीएचसी से पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए लाई थी। उनके साथ गीता के अलावा कोई करीबी परिवार का शख्स मौजूद नहीं था।
बच्चे का चारपाई के नीचे मिला शव
घटनास्थल में दोनों बच्चे चारपाई के नीचे पड़े मिले। बेटा कार्तिक रात को पिता नरेंद्र के पास सोया था। घटना के बाद कार्तिक का शव चारपाई के नीचे मिला। कविता, पति के पास से रात को बेटे को उठा ले गई थी। माना जा रहा है कि उसके बाद दोनों बच्चों को चारपाई में बांधा होगा। केरोसिन बच्चों पर डालने के बाद खुद को आग लगाई। जलने से तीनों की मौत हो गई।
इनसेट-
गृहस्थी भी जली
महिला के आग लगाने से पूरे घर में आग फैल गई। आग से छप्पर और कच्चा मकान जलकर बर्बाद हो गया। गृहस्थी का सारा सामान जलकर कूड़े के ढेर में तब्दील हो गया। कच्चे कमरों की छत, छप्पर भी जले हैं।