मनरेगा और चतुर्थ राज्यवित्त की वार्षिक योजना में प्रस्तावित कार्यों से इतर आठ कार्य का अनुमोदन हुआ। पैसा भी रिलीज करा लिया गया। लाखों रुपये के इस गोलमाल मेें हंसवा ब्लाक के अफसर-लिपिक के गठजोड़ का आरोप लगा है। एक क्षेत्र पंचायत सदस्य ने तत्कालीन डीएम सेल्वा कुमारी जे. के सामने यह भांडा फोड़ा।
क्षेत्र पंचायत सदस्य सुरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 की तैयार हुई मनरेगा की वार्षिक कार्ययोजना में कार्य संख्या एक से 88 तक काम कराए जाने थे। बीडीओ, आरईएस जेई व ब्लाक प्रमुख ने प्राक्कलन तैयार कराकर डीआरडीए के जरिए वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति 27 मार्च 2017 को हासिल की। इसमें 41.39 लाख के सापेक्ष 16.56 लाख का ईएफएमए प्रणाली से भुगतान की स्वीकृति भी करा ली गई। इसमें पूरी भट्ठा से सखियांव नहर पुल की नहर पटरी में मिट्टी की पुराई, औरेई नहर पुल से सातों रोड तक मिट्टी पुराई, रिठवां से मूसीपुर तक मिट्टी की पुराई, धरमपाल पासी के घर से सातों डेरा तक मिट्टी पुराई, मंडासरांय पक्की सड़क से मलांव सरहद तक मिट्टी पुराई, सखियांव से चकीवा चौराहा पक्की सड़क से मीरपुर तक मिट्टी पुराई व सरांय मोहन सलेमपुर से नौबस्ता टावर से सखियांव पक्की सड़क तक मिट्टी की पुराई के कार्य शामिल हैं। इनमें से एक भी कार्य कार्ययोजना की लिस्ट में शामिल नहीं है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य ने आरोप लगाया कि मनरेगा के साथ ही चतुर्थ राज्य वित्त सेमरा संपर्क मार्ग से धनाजीपुर तक खंड़जा निर्माण में भी खेल किया गया। यह संपर्क मार्ग तत्कालीन बीडीओ राजीव गुप्ता के कार्यकाल में 2015 में बना था। पांच साल पहले इस मार्ग की मरम्मत का कोई प्रावधान नहीं है। डीएम सेल्वा कुमारी जे. ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक दो दिन में छुट्टी से लौट रहीं सीडीओ सी. इंदुमति से जांच कराने का भरोसा दिया है।