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जांच में प्रबंधन और पीड़ितों के बयान में अंतर

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औंग(फतेहपुर)। साल्वेंट फैक्टरी के अग्निकांड की प्रारंभिक जांच में प्रबंधन फंसता दिखाई दे रहा है। कई घंटे की जांच में आग लगने के कारणों के बारे में प्रबंधन और पीड़ितों के बयान दर्ज किए गए हैं। जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी गई है। डीएम के आदेश पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
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औंग थाना क्षेत्र के गुधरौली गांव हाईवे पर त्रिवेणी साल्वेंट फैक्ट्री में सोमवार की शाम धमाके के बाद आग लग गई थी। घटना में 18 मजदूर झुलसे थे। गंभीर झुलसे 12 मजदूरों को कानपुर रेफर किया गया था। छह मजदूर कानपुर के मंगला हास्पिटल और छह हैलट में भर्ती कराए गए हैं। डीएम की सूचना पर इलाहाबाद से असिस्टेंट फैक्ट्री

डायरेक्टर जगदीश प्रसाद की टीम आई। उनके साथ असिस्टेंट लेबर कमिश्नर सुविज्ञ सिंह व गोविंद गुप्ता, मनोज शुक्ला , फायर सर्विस स्टेशन बिंदकी प्रभारी कमलेश कुमार, एसडीएम बिंदकी सुशील कुमार गोंड एक बजकर बीस मिनट पर घटनास्थल पर पहुंचे। बारीकी से जांच की। फैक्ट्री के डायरेक्टर शरद अग्रवाल, पुलकित अग्रवाल,
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मैनेजर केके वर्मा से आग लगने के कारणों को लेकर पूछताछ की। फैक्ट्री के एक कमरे में साढ़े तीन बजे तक अधिकारियों ने प्रबंधतंत्र से बातचीत कर बयान दर्ज किए। असिस्टेंट लेबर कमिश्नर व एसडीएम ने कानपुर के मंगला हास्पिटल, हैलट में भी घायलों के बयान दर्ज किए। एसडीएम ने बताया कि प्रबंधतंत्र और पीड़ितों के बयान

में भिन्नता सामने आई है। प्रारंभिक रिपोर्ट डीएम को सौंपी गई है। उनके निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर फैक्ट्री के डायरेक्टर पुलकित अग्रवाल ने बताया कि सारे कर्मियों की हालत में सुधार आ गया है। उनकी देखभाल की जा रही है।

फैक्टरी में आग बुझाने के लिए पानी पर्याप्त रहा है। इसके बावजूद कर्मियों को आग बुझाने में करीब पांच घंटे लग गए। शाम करीब साढ़े चार बजे लगी आग को रात करीब साढ़े नौ बजे बुझाया जा सका। अग्निकांड में टीनशेड, आसपास साल्वेंट बनाने का टैंक, कचरे की बोरियां तक आग से जली हैं। टीनशेड में मजदूरों के टंगे कपड़े जले

हैं। कहा जा रहा है कि आग लगने के वक्त वेल्डिंग मशीन से काम चल रहा था। टैंक का ढक्कन फटने के निकला कचरा वेल्डिंग मशीन की चिंगारी के संपर्क में आया होगा। पेट्रोल मिश्रण के चलते चंद मिनटों में आग लगी है। आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। पचास मीटर के दायरे में फैल गई। फैक्ट्री प्रबंधन पेट्रोल न होने की बात कह रहा है। मैनेजर केके वर्मा ने बताया कि साल्वेंट बनाने में पेट्रोल का कोई काम नहीं होता है।

साल्वेंट फैक्टरी से निकलने वाले तेल को साबुन बनाने व कचरे को मुर्गी दाने बनाने के काम में इस्तेमाल किया जाता है। खबर है कि इस तेल को बाजार में सस्ते दामों पर बेचा जाता है। शुद्घ तेल, रिफाइंड से इसकी कीमत आधी होने के कारण धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है। स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होता है। बाजार में कई नामों से ऑयल को जाना जाता है। शहर, देहात इलाकों में टीन डिब्बों में आयल की सप्लाई होती है।
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29- गुधरौली गांव हाईवे पर स्थित फैक्टरी में छानबीन करती टीम।
30- फैक्टरी में मजदूरों के जले कपड़े।

प्रबंधन और पीड़ितों के बयान में अंतर
कानपुर हैलट में भर्ती घायल मजदूरों के बयान दर्ज, डीएम को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी गई
गुधरौली गांव में त्रिवेणी साल्वेंट फैक्ट्री में सोमवार की शाम धमाके के बाद लगी थी आग

अमर उजाला ब्यूरो
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