अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। सपा शासन के अवैध खनन की जांच को आई सीबीआई टीम शुक्रवार की शाम साक्ष्यों को पुलिंदा लेकर लौट गई। टीम के 10 दिन तक यमुना में हुए मौरंग खनन के प्रकरण पर जिले में रहकर तफ्तीश जारी रखने से खनन के कारोबार से जुड़े लोगों की हवाइयां उड़ी रहीं। जिला छोड़ने से पहले टीम ने कुछ लोगों से बात करने के बाद गंगा घाट का भी रुख किया।
सीबीआई की चार सदस्यीय टीम डीएसपी केपी शर्मा के नेतृत्व में नौ जनवरी को आई थी। टीम ने वर्ष 2012 से 2015 के बीच हुए अवैध खनन की तह तक जाने के लिए हर पहलू पर काम किया। पीडब्लूडी के सर्किट हाउस के बंद कमरे में शिकायतकर्ताओं की बात सुनी, माफिया से लेकर उनके सहयोगियों को तलब किया। सीबीआई की क्लास में कई नामचीन चेहरे सामने आए। इनमें बांदा के एक माननीय से लेकर जिला पंचायत की राजनीति में दखल रखने वाले जनप्रतिनिधि भी शामिल थे।
टीम के सामने पेश हुए आधा सैकड़ा से ज्यादा लोगों में किसी को दोबारा बुलाया गया तो किसी को चौथी बार बुलाकर पूछताछ हुई। मौरंग घाटों का स्थलीय निरीक्षण करने वाली टीम ने खनन क्षेत्र की पैमाइश से लेकर वीडियोग्राफी कराई। करीब 10 दिन तक माफिया, उनके सहयोगी और शिकायतकर्ताओं से जुड़ी जरूरी जानकारी के साथ साक्ष्य के लिए फोटोग्राफ से लेकर वीडियो फुटेज तक हासिल करने का काम किया। शुक्रवार को टीम को दिल्ली लौटना था। टीम ने चलते चलते भी अपना काम जारी रखा। सूत्रों की मानें तो कुछ लोगों से फिर बंद कमरे में बात चली। इसके बाद टीम वाहन से गंगा घाट की ओर निकल गई। हालांकि यह कहां गई, इसका खुलासा नहीं हो सका। यह जरूर कहा जाता रहा कि टीम काम खत्म करने के बाद गंगा दर्शन को गई थी लेकिन जानकारों का इससे अलग विचार है। इनका मानना है कि टीम ने चलते चलते गंगा घाट का भी नजरीनक्शा जेहन में बसाने का काम किया है।
-जिला छोड़ने से पहले कुछ लोगों से पूछताछ भी की
-कई नामचीन चेहरों के नाम जुटाया साक्ष्यों का पुलिंदा