हथगाम (फतेहपुर)। नशे को लेकर हुई कहासुनी में युवक ने बुधवार की रात अपने साथी को मार डाला। उसे बहाने से खेत में ले गया और डंडे और ईंट से हमला कर हत्या कर दी। उसके हाथ-पैर बांधकर तालाब में फेंक दिया। पुलिस ने हत्यारोपी को मौके से पकड़ लिया। पुलिस के मुताबिक हत्यारोपी से पूछताछ में कोई ठोस वजह नहीं पता चली है। दोनों की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उनके बीच मारपीट हुई। उसी खुन्नस में घटना को अंजाम दिया गया।
मूल रूप से खागा कोतवाली क्षेत्र के कटोघन गांव निवासी छोटेलाल रैदास परिवार समेत कई साल से ससुराल सुल्तानपुर घोष थाने के मथुरादासपुर गांव में रहते हैं। छोटेलाल ने बताया कि उसका दूसरे नंबर का बेटा श्यामबाबू (35) मानसिक रूप से कमजोर था। वह पड़ोसी बूढ़नपुर गांव निवासी चंद्र किशोर के ट्यूबवेल में मजदूरी करता था और वहीं सोता था। सोमवार की रात करीब आठ बजे खाने के बाद वह सोने चला गया था। सुबह सीमावर्ती हथगाम थाने के लाडलेपुर गांव में शव मिलने की सूचना पर वह लोग पहुंचे।
थानेदार एके मिश्रा ने बताया कि श्यामबाबू का कुछ महीनों से लाडलेपुर के राधेश्याम लोधी के बेटे कामता प्रसाद से मिलना जुलना था। नशेबाजी के चलते कामता की भी मानसिक हालत ठीक नहीं है। अक्सर दोनों साथ घूमा करते थे। दोनों तंबाकू, गांजा का नशा करते थे। पुलिस पूछताछ में हत्यारोपी ने बताया कि रात में चौकी चौराहे पर वह श्यामबाबू के साथ बैठा था। उसने श्यामबाबू से तंबाकू मांगी। न देने पर कहासुनी के बाद दोनों में मारपीट हो गई। वह बहाने से श्यामबाबू को अपने घर लेकर पहुंचा। इसके बाद गांव में ही पीतांबर मौर्या की बाग की तरफ गया।
ग्रामीणों ने श्यामबाबू की छाती पर बैठकर कामता को मारते पीटते देखा। रोकने का प्रयास किया। कामता ने ग्रामीणों को भी जान से मारने की धमकी दी। कुछ देर बाद कामता घर लौटा। ग्रामीणों ने उसे शांत किया और 100 नंबर पर सूचना दे दी। पीआरवी मौके पर पहुंची। आरोपी को पकड़ लिया गया। इसके बाद घटनास्थल पर पीआरवी पहुंची। तालाब में श्यामबाबू का शव उतराता दिखा। खेत में खून पड़ा हुआ था। हेड कांस्टेबल वीरेंद्र मिश्रा ने टीम के साथ शव को बाहर निकाला। हाथ पैर रस्सी से बंधे थे।
साइड स्टोरी-
हत्यारोपी का गुस्सा देख ठिठक गए थे ग्रामीण
- ग्रामीण मुकाबला करते तो शायद बच जाती जान
- घरवालों पर भी कई बार हमलावर हो चुका है आरोपी
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। हथगाम थाने के लाडलेपुर गांव में श्यामबाबू की बगैर किसी ठोस वजह के हत्या की गई। पुलिस की छानबीन में हत्या जैसे संगीन अपराध के पीछे मामूली विवाद का ही बिंदु सामने आया है। हत्यारोपी का खौफ जरूर ग्रामीणों में दिखा। ग्रामीण कामता को हत्या करना देख रहे थे लेकिन उसका गुस्सा देख श्याम बाबू को बचाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। वे ठिठके कुछ दूरी पर खड़े रहे। कहा जा रा है कि हत्यारोपी का विरोध करते तो शायद उसकी जान बच जाती।
लाडलेपुर गांव निवासी कामता सिंह लोधी पहले से गुस्से की प्रवृत्ति वाला है। उसकी मां दुखिया देवी ने बताया कि बेटे की तीन माह से दिमागी हालत ठीक नहीं रहती हैञ। से झाड़फूंक कराने भी ले गए थे। पति और एक बेटा बाहर कमाते हैं। घर में वह छोटी बेटी चित्ररेखा के साथ रहती है। मानसिक हालत बिगड़ी होने के कारण बेटा कई बार उनके साथ भी मारपीट कर चुका है। सोमवार की रात घर आते ही उसके सिर में खून सवार दिखा था। वह बेटे को देखकर डर गई थी। तभी उसने पड़ोसियों को श्यामबाबू की जान बचाने को भेजा था। दुखिया के कहने पर रंजीत, रामलखन, नन्हू मौके पर पहुंचे थे। इन तीनों को कामता ने जान से मारने की धमकी दी। कामता को गुस्से में देखकर वह श्यामबाबू के बीच बचाव को आगे नहीं बढ़े। उधर, मृतक श्यामबाबू के पिता ने बताया कि उसका बेटा रोज शाम को घर खाना खाने आता था। उसके बाद चला जाता था। वह दिन भर पैदल घूमता रहता था। मानसिक संतुलन खो बैठे बेटे ने हत्यारोपी का क्या बिगाड़ा, उसे नहीं मालूम है। उसके पांच बेेटों रामबाबू, शिवसरन, अनिरुद्घ, शिवकरन में दूसरे नंबर का था। बेटे की मौत के गम में उसकी मां मैकी देवी और बहनों अंजू, ज्योति का हाल बेहाल हो गया। श्यामबाबू की मां मैकी देवी का मायका लाडलेपुर में है। वहां भाई श्रीनाथ रहते हैं। बेटा घूमते फिरते मां के मायके पक्ष के घर भी पहुंच जाता था। हत्यारोपी कामता लोधी की दो साल पहले शादी हुई थी। शादी के नौ दिन बाद पत्नी चौथी पर मायके चली गई थी।