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किसान धड़ल्ले से जला रहे कूड़ा

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहपुर। खेत में फसल के अवशेष जलाने वालों पर प्रशासन अंकुश नहीं लगा पा रहा है। सातो-नरैनी गांव के बीच में किसान धड़ल्ले से पुआल जला रहे हैं। अधिकारी और कर्मचारी सब जानते हुए भी नजरंदाज किए हैं। इससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है।

प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए शासन स्तर से फसलों के अवशेष जलाने पर रोक लगाई गई है। अधिकारियों और कर्मचारियों को मीटिंग में पुआल जलाने वाले किसानों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए थे, लेकिन कृषि विभाग व राजस्व विभाग के कर्मचारी अनदेखी किए हैं। बहुत से किसानों को पुआल जलाने पर रोकने लगने की जानकारी भी नहीं है।
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खरीफ की फसल में ही सबसे अधिक खेतों में अवशेष (धान का पुआल) जलाया जाता है। 60 फीसदी किसान ऐसे हैं, जो खेत में ही पुआल जलाकर रबी की फसल की बुआई करते हैं। सातों क्षेत्र के एक किसान ने बताया कि नहर के किनारे धान की फसल ही होती है। पुआल की अधिकता होने से खेत में ही जला दिया जाता है।

इससे फसल के साथ तैयार होने वाले खरपतवार के बीज नष्ट हो जाते हैं। एक अन्य किसान का कहना है कि मवेशियों को खिलाने के लिए भूसा हो जाता है। पुआल रखने की जगह भी नहीं है। इससे अच्छा है कि खेत में ही जला दो।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. नौशाद आलम ने बताया कि खेत में अवशेष जलाने से मिट्टी के उपजाऊ जीवाणु खत्म हो जाते हैं। इससे खेत की मिट्टी खराब हो जाती है। जलाने वाले अवशेष के धुआं से प्रदूषण फैलता है। इससे वातावरण दूषित होता है।

15- सातो के मोगरीबाग गांव में खेत के अवशेष (पुआल) में लगी आग।
किसान धड़ल्ले से खेत में जला रहे पुआल
अधिकारी नहीं लगा पा रहे हैं अंकुश
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