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...चाचा अभी नहीं मरा और गोली मारो

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहपुर। मामूली विवाद में हुई प्रेमपाल सिंह की हत्या से ग्रामीण थर्रा उठे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक प्रेमपाल सिंह पहली गोली पेट में छूकर निकलने के बाद और दिलेरी से खड़ा हो गया। उसके चेहरे पर दहशत नहीं थी। वह बोला, चाचा अभी मरा नहीं हूं और गोली मारो। इसके बाद शिवबालक सिंह ने तड़ातड़ चार फायर कर प्रेमपाल की जान ले ली।

चांदपुर कस्बे के रिटायर्ड फौजी शिवबालक सिंह ने सगे भतीजे प्रेमपाल की हत्या कर रिश्ते को तार-तार कर दिया। रिटायर्ड फौजी की हरकत ने सभी को दहशत में ला दिया। गोलियों की आवाज सुनकर लोग घरों में छिए गए। कस्बे में सन्नाटा पसर गया। सिर्फ शिवबालक की आवाज सुनाई देती रही।
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उसकी ललकार से बेबस प्रेमपाल का परिवार घर के अंदर सिसकता रहा। पत्नी सीतू ने बताया कि घटना के एक घंटे बाद पुलिस आई, जबकि घटनास्थल से थाना मात्र तीन सौ मीटर दूर है। इससे लोगों में नाराजगी है।

ग्रामीणों ने इसकी शिकायत पर एसपी श्रीपर्णा गांगुली से की है। उन्होंने जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। मौके पर फिंगर व फोरेंसिक टीम भी पहुंची। टीम ने हत्यारोपी के हाथ का प्रिंट लिया। उसके बाद बंदूक से निशान लिए। जमीन पर पड़े प्रेमपाल के खून के नमूने भी लिए हैं।

प्रेमपाल रविवार को पत्नी सीतू का इलाज कराने कानपुर जाने वाला था। सीतू को पथरी की शिकायत है। कानपुर जाने की तैयारी के लिए वह पूड़ी-सब्जी बना रही थी। पूड़ियां निकाल चुकी थी। सब्जी पकाने के लिए चूल्हे पर कढ़ाई रखी थी। छौंका लगाने के बाद ही बाहर से पति की आवाज सुनकर दौड़ पड़ी। पति को गोली देखकर वह बदहवाश सी हो गई। पुलिस के आने के बाद महिलाओं का घर में जमघट लग गया। महिलाएं उसे पानी डालकर होश में लाने की कोशिश करतीं, लेकिन वह बेहोश हो जाती थी।

चार भाइयों में सबसे छोटा था प्रेमपाल
प्रेमपाल चार भाइयों रामविलास, धर्मपाल, रामपाल से छोटा था। उसके दो भाई धर्मपाल और रामपाल फिरोजाबाद में प्राइवेट नौकरी करते हैं। प्रेमपाल भी गुजरात कमाने जाता था। परिवार के देखभाल रामविलास ही करते थे। दीपावली में वह गुजरात से लौटकर आया था। बेटा शिव और बेटी पल्लवी के सिर से पिता का साया छिन गया।

भतीजे की हत्या का आरोपी शिवबालक सिंह पांच भाई हैं। सबसे बड़े प्रेमपाल के पिता राजबहादुर हैं। वे काफी वृद्ध हो गए हैं। उनके बाद ललई, हरिभान, सुखनंदन और फिर शिवबालक सिंह है।

हत्यारोपी की पत्नी की करीब दस साल पहले मौत हो गई थी। पांच साल पहले बेटे दीपक की हादसे में मौत हो गई थी। इससे भी फौजी तनाव में रहता था। उसके पास घाटमपुर में ब्याही बेटी प्रियंका ही आती जाती थी।

घटना के दौरान प्रियंका भी पिता के सिर पर सवार काल को देखकर हैरत में पड़ गई थी। वह दरवाजे बंद कर घर में छिप गई थी।

उसके ससुराल पक्ष के लोग पहुंचे। उन लोगों ने प्रियंका के जहर खाने की बात कही और किसी तरह घर से निकाल कर साथ ले गए। हालांकि ग्रामीण जहर खाने को मौके से निकलने का बहाना मान रहे हैं।
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दीवारों पर छर्रे भयावह मंजर के गवाह
ताबड़तोड़ फायरिंग के मंजर दीवारें बयां कर रही हैं। गोली के छर्रे दीवारों में धंसने के साफ निशान मिले। घटनास्थल पर प्रेमपाल का खून भी खूब बहा। जिस जगह प्रेमपाल खड़ंजा खुदाई कर रहा था, वहां भी खून पड़ा था। कुछ दूरी पर प्रेमपाल ने दरवाजे के पास जहां दम तोड़ा, वहां भारी मात्रा में खून फैला था।
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