फतेहपुर। आतंकी हबीबुल्ला उर्फ सैफुल्ला की गिरफ्तारी का पहला मामला नहीं है, जब स्थानीय पुलिस और इंटेलीजेंस फेल हुई हों। पुलिस सिर्फ मामला एटीएस का बताकर पल्ला झाड़ने में जुटी है। करीब तीन साल से
आतंकी पाकिस्तानी आतंकवादियों और जिले से लगातार संपर्क में रहा। जिले से वर्चुअल, सोशल मीडिया के जरिये डाटा पाकिस्तान भेजता रहा। अपने आकाओं के निर्देशों का पालन करता रहा। इसके बाद भी स्थानीय पुलिस के साथ सर्विलांस और साइबर सेल पूरी तरह से नाकाम रहा।
जिले में धर्मांतरण की पाठशाला चलने की बात हो या फिर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के नेटवर्क में काम करने वाला उमर गौतम का मामला। लोकल पुलिस हर जगह नाकाम ही साबित हुई। जून में शहर के अंदर धर्मांतरण की पाठशाला चलने का मामला सामने आया था।
इसका खुलासा वाराणसी के एक युवक ने किया। इसके बाद से पुलिस मास्टर माइंड से दूर है। इसी तरह एटीएस ने एक साल पहले उमर गौतम के मामले का पर्दाफाश किया। उमर की सालों से जिले में मदरसों में फंडिग और स्कूलों में धर्मांतरण का मामला सामने आया।
स्थानीय पुलिस शिकंजे के तौर पर मुकदमे दर्ज करने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं कर सकी। ऐसे स्कूलों और मदरसों की तहकीकात और शिकंजा कसने में फेल हुई।
अब सैफुल्ला के मामले में पुलिस के पास एटीएस के निर्देश का इंतजार है। सैफुल्ला के नेटवर्क को खंगालना पुलिस उचित नहीं मान रही है। उसके परिवार के आय और संपत्ति के ब्योरे पर भी पुलिस की नजर नहीं जा रही है।