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दहेज हत्या में पति, सास-ससुर और देवर को सजा

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फतेहपुर। हुसैनगंज थाना क्षेत्र के बेरागढ़ीवा में दहेज की मांग को लेकर विवाहिता की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुभव द्विवेदी ने पति को दस वर्ष, सास, ससुर और देवर को सात-सात साल की सजा सुनाई। घटना के बाद से पति जेल में है। बाकी आरोपी जमानत पर थे। कोर्ट का फैसला आने के बाद सभी को जेल भेज दिया गया।
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पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक असोथर कस्बे के सुखराज ने अपनी बेटी शिवानी की शादी 22 फरवरी 2016 को हुसैनगंज थाना क्षेत्र के बेरागढ़ीवा निवासी सुनील से की थी। सुनील गांव में ही सराफा का काम करता था और उसका छोटा भाई अनिल शहर में सराफा का व्यवसाय करता था। शादी के कुछ दिन बाद से ही सुनील अपनी पत्नी
शिवानी पर मायके से साढ़े तीन लाख रुपये, एक बाइक, टीवी और फ्रिज दिलाने की मांग कर रहा था। मांग पूरी न होने पर आए दिन शिवानी के साथ मारपीट करता था। मांग पूरी न होने पर 29 नवंबर 2016 की सुबह दस बजे पति सुनील, सास सावित्री, ससुर रामकरन और देवर अनिल ने मिलकर शिवानी के खाने में जहर मिला दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
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तब से मामला न्यायालय में विचाराधीन था, जिसकी पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र उत्तम कर रहे थे। बुधवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुभव द्विवेदी ने पति सुनील को दस वर्ष, सास सावित्री, ससुर रामकरन और देवर अनिल को सात-सात साल की सजा सुनाई।
दहेज हत्या का शिकार हुई शालिनी के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एल्युमिनियम सल्फाइट होने की पुष्टि हुई थी। उसका विसरा सुरक्षित किया गया था। अदालत के आदेश पर एक साल बाद विसरा रिपोर्ट कोर्ट पहुंची, जिसमें शालिनी को जहर दिए जाने की पुष्टि हुई।
सहायक शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र उत्तम ने बताया कि इस मामले में मृतक शालिनी के पिता सुखराज कोर्ट के समक्ष दिए गए अपने बयान से मुकर गए थे। उनके देखादेखी तीन और गवाह भी मुकर गए। इस बीच मृतक की मौसी ने शालिनी को न्याय दिलाने के लिए अदालत के समक्ष अपनी गवाही दी। अदालत ने गवाही से मुकरने पर पिता सुखराज और अन्य तीन लोगों को नोटिस देकर इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की चेतावनी दी, तब ये लोग वापस अपने बयानों पर वापस लौटे। इस पूरे प्रकरण में नौ लोगों की गवाही के बाद आरोपियों को सजा दी गई।
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