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एफआईआर बदलाने के आरोप में छिनी थानेदारी

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फतेहपुर। गाजीपुर थाने के सिमौर गांव में पत्नी के हत्यारोपी पति को पीटकर मार डालने के मामले में एसपी ने थानेदार को हटा दिया है। कोतवाली में एसएसआई के पद पर तैनात सब इंस्पेक्टर दीनदयाल सिंह को थानेदारी दी गई है। थानेदार को क्राइम ब्रांच की इन्वेस्टीगेशन विंग में भेजा गया।
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गाजीपुर थाने के सिमौर गांव में अफ्सरी मायके में थी। छत्तीसगढ़ से पति निसार उसे लिवाने आया था। यहां विवाद होने पर निसार ने पत्नी की हत्या कर दी थी। उसके बाद ग्रामीणों ने निसार को लाठी-डंडे से पीटकर मार डाला था। मामले में पुलिस ने अफ्सरी की बहन शबनम की तहरीर पर निसार के आत्महत्या कर लेने की रिपोर्ट दर्ज की थी।
परिजनों के आने पर निसार की गैरइरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज की। बाद में वारदात का वीडियो वायरल होने पर हत्या में मामला तरमीम किया। इससे पुलिस की खासी किरकिरी हुई। नए एसपी प्रशांत वर्मा के तेवर देख निसार की हत्या करने वाले पांच आरोपियों को जेल भेजा गया। घटना में लगातार मोड़ आते गए। थानेदार पर सवाल खड़े हो
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गए। एसपी प्रशांत वर्मा ने बताया कि मामले की पुलिस की भूमिका की जांच कराने के आदेश दिए थे। सोमवार को एसओ संदीप तिवारी से थानेदारी छीनकर उन्हें क्राइम ब्रांच की इन्वेस्टीगेशन विंग में भेजा गया।
सिमौर गांव के अफ्सरी की हत्या की सूचना पर यूपी 100 पहुंची थी। हत्यारोपी निसार पुलिस के बुलावे पर कुल्हाड़ी लेकर बाहर निकला था। वह पुलिस को सरेंडर करना चाहता था लेकिन पुलिसकर्मी बैकफुट पर चली गई
थी। पुलिस कर्मियों के सामने कुछ लोगों ने निसार की पीट पीट कर हत्या की। इस दौरान पुलिस कर्मी मूकदर्शक बने रहे। वायरल वीडियो में स्पष्ट है कि हत्याकांड में अफ्सरी के परिवार के पांच से छह लोग निसार को डंडे और लोहे की रॉड से पीट रहे हैं। मरणासन्न हालत में उसकी सांसे चल रही थीं। उसके बाद भी वह लोग जिंदा नहीं छोड़ना चाहते थे। मौजूद पुलिस चंद हमलावरों को रोक नहीं पाई, जबकि पीआरवी पुलिस कर्मियों की संख्या तीन थी।
सिमौर गांव में सनसनीखेज हत्याकांड के मामले में तत्कालीन एसपी रमेश, एएसपी पूजा यादव, एएसपी/सीओ श्रीपाल यादव मौके पर पहुंचे थे। जांच में भीड़ की पिटाई से निसार की मौत होना पाया था। इसके बाद भी मामले को छोटा रूप दिया गया। सवाल उठता है कि जहां कप्तान मौके पर पहुंचे हों वहां थानेदार ने ऐसा किया, यह कैसे। महकमे में चर्चा रही कि पुलिस अधिकारियों के संज्ञान के बिना ऐसा नहीं हुआ होगा। यह भी जांच का विषय है।
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