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Fatehpur News: खेतों में दरारें...किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

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फोटो-11-असोथर क्षेत्र में खड़ी धान की फसल। संवाद
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फतेहपुर। गर्मी, उमस और पर्याप्त बारिश न होने से जिले के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही हैं। क्योंकि धान लगे खेतों में पानी की जगह दरारें नजर आ रही हैं। कहीं हल्की बूंदाबांदी तो कहीं दिनभर बादलों की आवाजाही के बावजूद खेतों की प्यास नहीं बुझ पा रही है। इसका सीधा असर धान की रोपाई पर पड़ रहा है। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। वहीं मौसम की बेरुखी किसानों उम्मीदों पर भारी पड़ रही है।
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जिले में कृषि विभाग ने इस वर्ष एक लाख 14 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया है। 15 जून के बाद अच्छी बारिश की उम्मीद थी लेकिन अब तक पर्याप्त वर्षा न होने से धान की खेती पिछड़ गई है। सोमवार रात जिले के कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हुई। इससे खेतों को कोई खास राहत नहीं मिली। मंगलवार को अधिकतम तापमान 34 और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
दिनभर तेज धूप और उमस से लोग बेहाल रहे। बादलों की आवाजाही के बावजूद बारिश नहीं हुई। कुछ किसानों ने निजी नलकूपों के सहारे धान की रोपाई कर ली है लेकिन लगातार बढ़े तापमान से खेतों की नमी तेजी से कम हो रही है।
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किसानों का कहना है कि नलकूप से निकलने वाला पानी भी गर्म हो जाता है। इससे धान की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। कई स्थानों पर नमी की कमी से फसलों में दीमक लगने लगी है। कीटों से बचाव के लिए दवाओं का छिड़काव करना पड़ रहा है। इससे खेती की लागत बढ़ रही है।
नदियां, नाले और अधिकांश नहरें सूखी पड़ी हैं। कुछ नहरों में पानी छोड़ा गया लेकिन वह टेल तक नहीं पहुंच सका। इससे नहर किनारे के किसानों को भी सिंचाई के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है। कई किसान अब तक धान की रोपाई शुरू नहीं कर सके हैं और तैयार नर्सरी भी सूखकर खराब होने लगी है।
बहुआ ब्लॉक के काजीपुर गांव निवासी किसान अशोक द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने धान की नर्सरी तैयार की थी लेकिन पर्याप्त बारिश न होने के कारण अब तक रोपाई नहीं करा सके। खेत खाली पड़े हैं और पानी के अभाव में नर्सरी भी सूखकर खराब हो गई है।
शाह कस्बा निवासी सत्यप्रकाश विश्वकर्मा ने बताया कि वह हर वर्ष करीब 10 बीघे में धान की खेती करते थे। इस बार मौसम का मिजाज देखते हुए केवल दो बीघे में रोपाई कराई है। निजी नलकूप से किराये पर पानी लेकर खेती करना महंगा पड़ रहा है। नलकूप संचालक करीब 100 रुपये प्रति घंटे की दर से पानी दे रहे हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।
दहेली गांव निवासी रामभजन साहू ने बताया कि उनके खेत नहर के किनारे हैं। पहले नहर में पानी आने और समय पर बारिश होने से धान की खेती आसान रहती थी। इस बार नहर सूखी है और बारिश के भी आसार नहीं हैं। ऐसे में उन्होंने धान की जगह खेतों में तिल की बोआई कराई है।

फोटो-11-असोथर क्षेत्र में खड़ी धान की फसल। संवाद

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