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आओ दीये जलाकर मनाएं प्रदूषण रहित दीपावली

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दीपावली का त्योहार खुशियां लेकर आता है। यह खुशी दीयें की टिमटिमाती रोशनी से लेकर आसमान पर फूटने वाले पटाखों की सतरंगी छटा के रूप में नजर आती है। यकीनन यह सब इस त्योहार का अभिन्न अंग है। मिठाई संग दीप और पटाखा इसकी पहचान है लेकिन यह खुशी, दीप और मिठाई पर भी मिल सकती है। तो क्यों न यह दीपावली ऐसी मनाएं कि प्रदूषण से पर्यावरण को जरा सी भी क्षति न पहुंचे।
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अमर उजाला के एक युद्ध पटाखों के विरुद्ध अभियान ने समाज को पर्यावरण को बचाने की मुहिम में शामिल होने का प्लेटफार्म दिया है। यही वजह है कि रोज का रोज इस मुहिम को कारवां मिलता जा रहा है। व्यापारी समाज भी इस अभियान को समय की दरकार मानते हुए साथ देने को आगे आया है। इसका कहना है कि पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का धर्म है। पर्यावरण के बगैर जीवन की कल्पना बेमानी है। जो हालात पैदा हो रहे हैं उसे देखते हुए समाज को ऐसी रवायत से बचना होगा जो परोक्ष और अपरोक्ष रूप से समाज को नुकसान पहुंचाती है।
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पड़ोसी जिला दे रहा खतरे की आहट
फतेहपुर। दीपावली से पहले कई शहरों में हवा जहरीले स्तर पर पहुंच गई है। कानपुर की ही बात करें तो शनिवार को यहां का एक्यूआई का स्तर 400 को पार करके 412 दर्ज किया गया। चूंकि जिले में प्रदूषण नियंत्रण विभाग का दफ्तर नहीं है। ऐसे में यहां का एक्यूआई मापने की कोई व्यवस्था नहीं है। कानपुर से यहां की दूरी 92 किलोमीटर है। बिंदकी तहसील क्षेत्र के औद्योगिक एरिया में एक फैक्ट्री पर प्रदूषण फैलाने पर हाल ही में कार्रवाई भी की जा चुकी है। ऐसे में व्यापारी समाज मानता है कि पड़ोसी जिले में प्रदूषण की खतरनाक आहट को महसूस करते हुए यह दीपावली पटाखा रहित मनाकर पर्यावरण का महफूज किया जाएगा।
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