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इटैलियन, थाई व्यंजनों की थी बुकिंग, बाटी-चोखा में हुई शादी

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फतेहपुर। कानपुर के एक भव्य रिजॉर्ट में होने वाली आलीशान शादी कोरोना संक्रमण के चलते सिमटकर रह गई। पहले जहां शादी के लिए थाई, इटैलियन, चाइनीज, इंडियन, जैपनीज और मुगलई व्यंजनों की बुकिंग की गई थी। वहीं संक्रमण के चलते केवल दस बरातियों की इच्छा पर मटकी दाल, बाटी-चोखा, चावल का इंतजाम कर शादी की रस्में निभाई गई।
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खागा कस्बे के रेलवे क्रासिंग के पास रहने वाले आशुतोष पांडेय अधिवक्ता है। उनके बड़े भाई संजय पांडेय की पुत्री शिवानी (मार्केटिंग इंटरप्रेन्योर) की शादी 28 अप्रैल को होनी थी। शादी कानपुर के रहने वाले परीक्षित मिश्रा (साफ्टवेयर डेवलपर) के साथ तय थी। इसके लिए कानपुर में एक आलीशान रिजॉर्ट बुक कराया गया था। परीक्षित स्वयं बेल्जियम के मेकेलेन में रहते हैं और उनके अधिकांश पारिवारिक सदस्य विदेशों में रहते हैं। विदेशी मेहमानों की खातिरदारी में कहीं कोई कमी न हो, इसके लिए लड़की के पिता ने रिजार्ट में मुगलई, जैपनीज, इंडियन, चाइनीज, इटैलियन और थाई व्यंजनों के तरह-तरह के पकवानों का लंबा चौड़ा मेन्यू तैयार किया था।
इससे पहले की शादी होती, कोरोना संक्रमण ने ऐसे पांव पसारे की सारी व्यवस्थाएं धरी रह गईं। वर पक्ष की ओर से यह संदेश दिया गया कि शादी अब शिवानी के पैतृक गांव खागा कस्बे से और बिल्कुल नियमों का पालन करते हुए सीमित तरीके से की जाए। मेहंदी के दिन मेहमानों के लिए अब कढ़ी-चावल, चने की दाल, मक्के और बाजरे के आटे की रोटी, गन्ने का रस, रसेवर (गन्ने का रस व चावल) बनाया गया। जब 28 अप्रैल को बरात खागा पहुंची तो केवल दस बराती ही थे। पांडेय परिवार की ओर से उनका स्वागत किया गया और आवास में ही शादी की रस्में अदा की गईं। मेहमानों के भोजन के लिए मटकी में देशी तरीके से बनी दाल, बाटी-चोखा, चावल और आम की चटनी का इंतजाम किया गया। हाईप्रोफाइल स्तर से एकदम साधारण और बेहद देशी तरीके तक सीमित हुए इस वैवाहिक कार्यक्रम की चर्चा पूरे कस्बे में रही।
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