फतेहपुर। कोरोना के भयावह संक्रमण काल में लोगों में आए अवसाद और तनाव ने भी कई की जानें लीं। इस बात की खुलासा मरीजों के उपचार में लगी होम्योपैथिक चिकित्सकों की टीम के शोध से हुआ है। जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. अंबरीश चंद्रा और डॉ. जया निगम ने मरीजों पर शोध किया है।
चिकित्सकों ने बताया कि बड़े पैमाने पर ऐसे मामले सामने आए, जिनमें लोगों की जांच रिपोर्ट तो सामान्य थी लेकिन उनकी हालात बेहद नाजुक थी। ऐसे लोगों को होम्योपैथिक दवाओं का 10 दिन का उपचार उपलब्ध कराया गया और परिणाम सार्थक साबित हुए।
डॉ. अंबरीश और डॉ. जया निगम ने अपने शोध के जरिए बताया है कि पॉजिटिव मरीजों के ऑक्सीजन लेवल में गिरावट की एक बड़ी वजह अवसाद, तनाव और उलझन सामने आया है। पॉजिटिव मरीज किसी तरह का तनाव लेते हैं तो शरीर में ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ जाती है। शोध में यह तथ्य सामने आया है कि तनाव और अवसाद से मरीज का बेसिक मेटाबॉलिक रेट बढ़ जाता है, जिससे ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ने लगती है।
डॉ. जया निगम कहती हैं कि तनाव और अवसाद मरीज पर हावी होने लगता है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह समस्या अधिक मिली है। महिलाओं में हारमोन असंतुलन ज्यादा तेजी से होता है। इसलिए उनमें तनाव या अवसाद के मामले अधिक मिलते हैं।
उन्होंने बताया कि ओपीडी बंद चल रही है और टेली मेडिसिन के जरिए लोग हर रोज कॉल करके अपनी समस्या बताते हैं। कई मरीजों के एक जैसे लक्षणों में कुछ विशेष दवाओं का प्रयोग किया गया तो परिणाम अच्छे साबित हुए और लोगों ने तेजी से रिकवर किया।
कल क्या होगा, इस डर ने सबको तोड़ा
चिकित्सकों के शोध में पता चला है कि कोरोना पॉजिटिव रहते हुए होम आइसोलेशन के दौरान अकेले में रह रहे लोगों के मन में कल क्या होगा, इस डर ने घर कर लिया और इसी तनाव ने मस्तिष्क में ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ा दी और मरीज खतरे में आ गए। होम्योपैथी की टेली मेडिसिन सेवा से ठीक हुए कुछ मरीजों के मामले भी सामने आए हैं।
होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. जया निगम ने बताया कि बीमारी के दौरान भी महिलाएं अपने स्वास्थ्य से ज्यादा परिवार के बारे में सोचती रहती हैं। जिसके कारण तनाव का शिकार हो जाती हैं। इसीलिए महिलाओं में ऑक्सीजन की समस्या ज्यादा देखने को मिली। होम्योपैथिक दवाओं के सेवने से पहले किसी भी मरीज का स्वास्थ्य परीक्षण होना जरूरी है। बिना जांच के उपचार नहीं शुरू किया जा सकता।
जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. अंबरीश चंद्रा ने बताया कि तनाव या अवसाद जो कुछ भी है, घर में रह रहे मरीज के लिए जरूरी है कि आत्मबल और सकारात्मक सोच बनाए रखे। रोगी होम्योपैथिक दवाओं के साथ एलोपैथ की दवाएं भी ले सकते हैं।