फतेहपुर। सात सीटर निजी वाहनों के मालिकों के लिए राहत की खबर है। निजी वाहनों की नियमित फिटनेस जांच कराने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसका लाभ उन वाहन मालिकों को मिलेगा, जिन्हें पहले हर दो वर्ष में वाहन की फिटनेस करानी पड़ती थी।
अब तक सात सीटर तक के निजी वाहनों के लिए निर्धारित अवधि पर फिटनेस प्रमाणपत्र से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करनी होती थीं। नई व्यवस्था से वाहन मालिकों का समय और फिटनेस जांच पर होने वाला अतिरिक्त खर्च बच सकता है।
हालांकि, फिटनेस जांच से छूट मिलने का मतलब वाहन की सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी से छूट नहीं है। सड़क पर वाहन चलाने के लिए वाहन को निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप रखना जरूरी होगा।
नई व्यवस्था से संबंधित आधिकारिक निर्देश और नियम लागू होने की तारीख परिवहन विभाग की अधिसूचना के अनुसार स्पष्ट होगी। निजी सात सीटर वाहन मालिकों के लिए यह व्यवस्था परिवहन संबंधी औपचारिकताओं में राहत देने वाली है।
सात सीटर निजी वाहनों की फिटनेस जांच की अनिवार्यता खत्म होने से वाहन मालिकों को राहत मिलेगी। पहले हर दो वर्ष में फिटनेस कराना अनिवार्य था।
- संतोष सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन।