कृषि विज्ञान केंद्र थरियांव में प्रशिक्षण देते कृषि वैज्ञानिक
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फतेहपुर में कृषि विज्ञान थरियांव में शुरू तीन दिवसीय वर्मी कम्पोस्ट खाद उत्पादन प्रशिक्षण के अंतिम दिन कृषि वैज्ञानिकों ने विस्तार से जानकारी दी। इसमें 35 श्रमिक मजदूर और किसानों ने हिस्सा लिया। डॉ. संजीव शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया।
केवीए प्रभारी डॉ. आरके सिंह ने कहा कि खेती के लिए रासायनिक खाद से वर्मी कम्पोस्ट अधिक लाभकारी है। वर्मी कम्पोस्ट से खेत की मिट्टी उपजाऊ बनती है और फसलों में रोग भी नहीं लगते हैं। फसलों के अवशेष, पालतू मवेशियों के गोबर से इसको आसानी से बनाया जा सकता है।
डॉ. नौशाद आलम ने वन प्रोड्यूस वन डिस्ट्रिक्ट के बारे में किसानों को जानकारी दी और वर्मी कम्पोस्ट की उपयोगिता बताई। किसानों को मृदा स्वास्थ्य, पैदावार की अच्छी उपज, बनावट, स्वाद, साइनिंग के विषय में विस्तृत जानकारी दी। महिला वैज्ञानिक डॉ. साधना वैश्य ने सब्जी वाली सफल में वर्मी कम्पोस्ट उपयोग करने को कहा।
साथ ही आलू, टमाटर की रेसिपी बनाने के तरीका बताए। डॉ. देवेन्द्र स्वरूप ने जैविक खाद के लिए पशुपालन अच्छा विकल्प बनाया। पशुपालन से किसान को दोहरा लाभ होगा। एक तो दूध बेच कर घर का खर्च चला सकता है और वर्मी कंपोस्ट बनाकर खेत में डाल सकते हैं।
रासायनिक खाद बाजार से नहीं खरीदनी पड़ेगी। मौसम विशेषज्ञ सचिन शुक्ला ने किसानों को मौसम के अनुकूल खेती करने की सलाह दी। इस मौके पर विवेक दुबे, सुघर यादव समेत तमाम किसान मौजूद रहे।