कड़ाके की ठंड व शीतलहर रबी फसलों की दुश्मन बन गई है। ठंडी के मौसम की एक माह से तब्दीली न होने पर अधिकतर फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं। इससे आलू, हरी सब्जी, दलहन, तिलहन की फसलें शीतलहर की चपेट में आने के बाद अब गेहूं की फसल पर भी असर दिखाई देने लगा है। फसल बचाव के सभी उपाय बेमकसद साबित हो रहे हैं।
किसान अपनी किस्मत पर आंसू बहा रहा है। खरीफ की फसल में सूखे से बर्बाद किसानों को एक बार फिर से मौसम की बेरुखी का सामना करना पड़ रहा है।
एक माह से लगातार ठंड, कोहरा और शीतहर का प्रकोप जारी है। इससे किसानों की आलू, केला, राई/सरसो, अरहर की फसलें पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं।
भारतपुर के किसान मलखान सिंह ने बताया कि 20 बीघा आलू की फसल बुआई की थी। शीतलहर की वजह से आलू के फलों में बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है। 20 दिन पहले आलू का फल जितना था, अब भी उतना ही है।
आलू के पौधों में झुलसा रोग भी लग गया है। बचाव के लिए दो बार दवा का छिड़काव किया गया लेकिन कोई असर नहीं हुआ। मलांव के किसान रामभवन लोधी व टेक्सारी बुजुर्ग के किसान आरके लोधी ने बताया कि गेहूं की फसल में अभी तक शीतलहर का असर नहीं था। अब गेहूं के पौधे भी पीले पड़ गए हैं।
इस मौसम में न तो कोई दवा असर कर रही है, न ही उर्वरक का असर हो रहा है।