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यमुना के प्रकोप से तबाही की कगार पर तटवर्ती गांव

Tue, 23 Aug 2016 12:18 AM IST
अमर उजाला फतेहपुर
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नाव से पार होकर स्कूल जाते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
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यमुना के प्रकोप से तटवर्ती क्षेत्र के आधा सैकड़ा गांव जूझ रहे हैं। तेज कटान से तटवर्ती किसानों की सैकड़ों बीघा की फसल नदी में समाहित हो गई है।
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ऊपरी हिस्से की फसल तिल, अरहर, ज्वार और बाजरा में बाढ़ का पानी भरा है। तटवर्ती क्षेत्र के गांव व दूसरे जिले को जोड़ने वाले कई प्रमुख संपर्क मार्ग बंद कर दिए गए हैं। उफनाए नालों को लोगों को नाव से पार होना पड़ रहा है। यमुना नदी का पानी तेजी बढ़ रहा है। ललौली क्षेत्र के कई गांव में पानी घरों के अंदर घुस गया है। बचाव में जुटे कर्मचारी लोगों को गांव से निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं। संपर्क टूटने वाले गांवों के स्कूली बच्चे जैसे-तैसे स्कूल पहुंच रहे हैं।


दो मीटर बचा खतरे का निशान
बहुआ (फतेहपुर)। ललौली क्षेत्र में केन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। रातभर में एक मीटर पानी ऊपर आ गया है। अब खतरे का निशान महज दो मीटर बचा है। अगर इसी रफ्तार से यमुना नदी का पानी बढ़ता रहा तो रातभर में खतरे के निशान तक पानी आ जाएगा। ललौली कस्बा से होकर बांदा जाने वाले राष्ट्रीय मार्ग पर पुलिस ने बैरीकेटिंग लगा दी है। इससे ललौली-मुत्तौर मार्ग, कोर्रा कनक मार्ग पर आवागमन बंद हो गया है। बांदा से बिंदकी, कानपुर जाने वाली रोडवेज बसों को भी रोक दिया गया है। ललौली, ओनई, घनश्याम का डेरा, अढ़ावल, इमिलिहा डेरा में घरों के अंदर पानी घुस गया है। लोग गृहस्थी का सामान बाहर निकाल कर सुरक्षित स्थान पर जा रहे हैं।
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इन गांवों से संपर्क टूटा
बाढ़ के कारण कोर्रा कनक, ओती, शबरीघाट, धोबिया, घनश्याम का डेरा, भूप का डेरा, चौहइया डेरा, केवटन डेरा, देवरी, बेलखरा, इमिलिहा डेरा, कुनुहा डेरा और केउटरा मजरों का संपर्क टूट गया है।  

पलटू का पुरवा के ग्रामीण भगवान भरोसे
यमुना के तट पर बसे पलटू का पुरवा को बाढ़ के पानी ने 24 घंटे पहले ही घेर लिया है। जिला मुख्यालय और पुलिस प्रशासन से ग्रामीणों का संपर्क टूट गया है। लगातार यमुना के उफान से ग्रामीणों के घरों में पानी घुस गया है। गांव में अभी तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचे हैं। यहां के लोग और मवेशी भी बाढ़ में फंसे हैं।

बंधवा में पुलिस ने लगाई बैरीकेटिंग
बांदा जाने वाले राष्ट्रीय मार्ग बंधवा में पुलिस ने बैरीकेटिंग लगा दी है। बांदा जाने वाले वाहनों को बहुआ मार्ग होकर भेजा जा रहा है। बहुआ से यमुना नदी के बेंदा पुल से होकर वाहनों का आवागमन हो रहा है।

चौकी में भरा पानी
बेंदा पुल पर बनी दतौली पुलिस चौकी के अंदर बाढ़ का पानी भर गया है। चौकी में तैनात पुलिस कर्मी कार्यालय से बाहर हाईवे पर तंबू लगा लिए हैं। उधर यमुना के बाढ़ से क्षेत्र का मोहंडा नाला उफना गया है। इससे रमसोलेपुर, सैंबसी, सरकंडी, लक्ष्मनपुर गांव का कस्बा से संपर्क टूट गया है। नाव से पार होकर लोग कस्बा आते हैं।

यमुना के उफान से लोगों में दहशत
जाफरगंज (बिंदकी)। बाढ़ से तटवर्ती क्षेत्र के कई गांव तबाही की चपेट में आ गए हैं। यमुना के उफान का पानी जिले की रिंद नदी के बहाव को रोक दिया है। रिंद नदी में यमुना का पानी उफान मार रहा है। अभी तक बिंदकी तहसील की बाढ़ नियंत्रण टीम व राजस्व विभाग के कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचे हैं। बाढ़ से ककोरा, बारा, बिंदौर, सैमसी, गंगौली, जमरौली, परसादीडेरा, रेगना, द्धावाबा, द्वारिकापुर, मौहारी, कुकेड़ी सहित दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। ग्रामीण साधू यादव, प्रधान छत्रपाल, राजेश सेंगर, प्रहलाद निषाद, समसेर सिंह, लालबहादुर, ननकवा बाल्मीकि, लाखन सिंह, राजेश शुक्ला ने बताया हजारों बीघा अरहर, तिल्ली, मूंग, बाजरा, ज्वार की फसलेें डूब गई हैं।

पानी बढ़ा तो डूबेंगे तीन गांव
जाफरगंज (बिंदकी)। ग्रामीणों का कहना कि यमुना नदी का पानी एक फीट ऊपर आया तो तटवर्ती गांव कुकेड़ी, गंगौली, सैमसी पूरी तरह से डूब जाएंगे। उन्होंने बताया कि बाढ़ चौकियां सिर्फ कागजों पर बनी है। बाढ़ क्षेत्र में एक भी कर्मचारी नहीं आया है। सुरक्षा के लिए नाव व अन्य कोई व्यवस्था प्रशासन की नहीं की है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
एडीएम आलोक सिंह ने बताया कि बाढ़ चौकियां और तटवर्ती क्षेत्र में शिविर बना दिए गए हैं। अभी तक किसी प्रकार की जनहानि होने की रिपोर्ट नहीं आई है। सभी एसडीएम बाढ़ क्षेत्र में जाकर मुआयना कर रहे हैं। प्रतिदिन तीनों तहसीलों से जिला कार्यालय में रिपोर्ट भेजी जा रही है।
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गंगा में आई बाढ़ और पांडु नदी के उफान से प्रभावित क्षेत्र का डीएम ने सोमवार को दौरा किया। इससे ग्रामीणों को कुछ आस दिखाई दी। डीएम डा. वेदपति मिश्रा ने एसडीएम बिंदकी जेएन सचान के साथ पिछले सप्ताह बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र बेनीखेड़ा, बेरीनारी का दौरा किया। उन्होंने कहा कि गंगा में चलने वाली नावों को किराए पर लिया गया है। बाढ़ का खतरा होने पर ग्रामीणों की नाव से खाद्य सामग्री प्रदान की जाएगी। नाव चलाने वाले श्रमिकों को मेहनताना दिया जाएगा।
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