जिले में अतिक्रमण हटाओ अभियान में चौतरफा विकास की तस्वीर भले ही दिखाई जा रही हो, लेकिन मौजूदा समय पूरा शहर खंडहर के ढेर में तब्दील है। जहां अतिक्रमण तोड़ा गया या खुद लोगों ने ढहाया आसपास नाले-नालियां मलबे से पट गई हैं। मामूली बारिश में ही नाली-नाले उफनाने से पानी घरों और गलियों में भर रहा है। लोग परेशान हैं, लेकिन किससे कहें। इधर, जिला प्रशासन ने मलबा हटाने के मामले में चुप्पी साध रखी है।
अतिक्रमण अभियान ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था ध्वस्त कर दी है। ज्यादातर सड़कों के दोनों ओर अतिक्रमण के दायरे में आए भवन और दुकानें टूटने का मलबा नाले और नालियों में अटा पड़ा है। सड़कों और नालों के ऊपर पड़ा मलबा तो लोग उठा ले जा रहे हैं, लेकिन नालों के अंदर भरा मलबा जस की तस हालत में है। यह समस्या किसी एक स्थान की नहीं है। ऐसी स्थिति जहां भी अतिक्रमण हटाओ अभियान चला है, वहां की है। अभियान ज्वालागंज से राधानगर चौराहे तक, देवीगंज ओवर ब्रिज की सर्विस लेन, जिला अस्पताल से शादीपुर रेलवे क्रासिंग तक, पटेलनगर चौराहे से वर्मा तिराहे तक, ज्वालागंज बस स्टैंड से आबूनगर तक जीटी रोड, परत्थरकटा चौराहे से लाल बहादुर शास्त्री चौराहे तक नाले और नालियों में मकानों का मलबा भरा है। ऐसे में लोगों के सामने समस्या खड़ी हो रही है। बीच-बीच में हो रही बरसात में लोगों घरों के अंदर तक पानी भर जाता है, जिसे निकलने में घंटों का समय लग रहा है।
शहर के इन मोहल्लों की बदली तस्वीर
ज्वालागंज से राधानगर चौराहे तक, देवीगंज ओवर ब्रिज की सर्विस लेन, जिला अस्पताल से सादीपुर रेलवे क्रासिंग तक, पटेलनगर चौराहे से वर्मा तिराहे तक, ज्वालागंज बस स्टैंड से आबूनगर तक जीटी रोड, परत्थरकटा चौराहे से लाल बहादुर शास्त्री चौराहे तक नाले और नालियों में मकानों का मलबा भरा है। नालों में भरा मलबा हटाने को लेकर नगर पालिका परिषद ने प्रयास तक नहीं किया है। ऐसे में लोगों के सामने समस्या खड़ी हो रही है। बीच-बीच में हो रही बरसात में लोगों घरों के अंदर तक पानी भर जाता है, जिसे निकलने में घंटों का समय लग रहा है।
मलबा को उठाने की जिम्मेदारी भवन मालिक की है
नगर पालिका सफाई प्रभारी दिलशाद अली ने बताया कि अतिक्रमण हटाने में टूटा मलबा को उठाने की जिम्मेदारी स्वयं भवन स्वामी की होती है। अगर नगर पालिका को मलबा हटाना पड़ा, तो उसका हर्जा खर्चा मकान मालिक को देना पड़ेगा। ऐसे में अभी लोगों को सुविधा दी गई है कि वह खुद अपने घरों के सामने नालों में भरा मलबा हटवाकर जलनिकासी बहाल कराएं। यदि हालात बिगड़े तो नगर पालिका हर्जा-खर्चा वसूल कर मलबा जब्त करेगी।
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अतिक्रमण के दायरे वाली सड़कें-15
प्रभावित होने वाली मोहल्ले-23
अभी सड़कों पर नहीं चला अभियान-5
घर टूटने के मलबा नाले में भरा है, जिससे घरों का गंदा पानी नाले के बजाय सड़क फुटपाथ में भर रहा है। दरवाजे पर जलभराव के कारण मच्छरों की बाढ़ आई है। मच्छरों ने रात की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। नगर पालिका भी नाले में भरा मलबा हटाने नहीं आ रही है। गोपीचंद्र, सिविल लाइन, फतेहपुर
पुराना मकान सास के नाम है। उसने यह मकान जेठ को दो दिया है। किसी तरह ऊपरी मंजिल के एक कमरे में गुजर बसर कर रही थी। उसका भी एक हिस्सा टूट गया है। ऐसे में जलभराव की सडांध के कारण रात में चैन की नींद नहीं आती है। सडांध के बीच खाना पानी करने को मजबूर होना पड़ रहा है। रूबी गुप्ता, सिविल लाइन, निकट क्षत्रिय छात्रावास
एक-एक पैसा जुटा कर पहले मकान बनवाया। प्रशासन ने बड़ा हिस्सा ध्वस्त कराकर मलबा गिराया और चला चल दिए। मिट्टी के बिक्री करने वाले ट्रैक्टर चालक ऊपर का मलबा तो उठा ले गए हैं, लेकिन नाले नालियों के अंदर का नहीं उठा रहे हैं। ऐसे में गंदा पानी घर के दरवाजे तक भर रहा है। हरिशंकर गुप्ता, लालबहादुर शास्त्री चौराहा, सिविल लाइन
अतिक्रमण के दायरे में आने वाले दुकान और मकान प्रशासन ने गिरवा दिया है। लोग किसी तहर से अपने घर निर्माण कराकर सुरक्षित कराने में जुटे में हैं। ऐसे में नाले नालियों में डंप मलबा उठाना कैसे संभव है। नगर पालिका नाले नालियों की सफाई कराकर जलनिकासी बहाल कराए। मनोज रस्तोगी, पत्थरकटा चौराहा, सिविल लाइन