बौंडर से मनावा तक नहर में सिवार (पानी में होने वाली घास) पानी के बहाव में बाधक बनी हुई है। इससे जरौली पंप कैनाल के सभी पंप कैनाल चलाने पर नहर ओवरफ्लो होती है और कहीं न कहीं खांदी कट जाती है। किसानों का आरोप है कि सिल्ट सफाई में सिवार साफ कराने की बजाय ठेकेदार खानापूरी करते हैं। इससे नहर में पानी का बहाव ठीक से नहीं हो पाता है।
बौंडर गांव के किसान बबलू सिंह, सुजानपुर के प्रताप चौहान का कहना है कि सिवार घास पानी के अंदर जाल बना लेती है। इससे पानी का बहाव रुक जाता है। बौंडर गांव के पास से मनावा गांव तक नहर में सिवार ने जाल बना लिया है। इससे नहर का पानी बह नहीं पाता है। कुछ पानी ओवरफ्लो होकर बौंडर स्केप से फिर यमुना नदी में बह जाता है। स्केप में पानी रोक देने पर नहर ही ओवरफ्लो हो जाती है और कहीं न कहीं खांदी कट जाती है। इससे विजयीपुर विकास खंड क्षेत्र के आगे पानी नहीं पहुंचता है। किसान रामखेलावन, संतोष तिवारी और शिवराम का कहना है कि सिल्ट सफाई के लिए साल में दो बार रुपया मंजूर होता है।
इनका आरोप है कि सिल्ट सफाई की धनराशि में ठेकेदार और अधिकारी मानक के अनुसार काम नहीं कराते हैं। खानापूरी कर धनराशि को हजम कर लेते हैं। इससे टेल के किसानों को फसल सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलता और हेड में खांदी होने से किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं। अधिशासी अभियंता वैभव सिंह का कहना है कि सिवार की जड़ मिट्टी में रह जाती है, जो पानी आते ही तेजी से फिर फैल जाती है। नवंबर की सिल्ट सफाई में सिवार को एक तरफ से साफ करा दिया गया था, लेकिन फिर से फैल गई है। अगले बजट मेें फिर सफाई कराई जाएगी।