खागा। खागा विधानसभा क्षेत्र के अनुसूचित जाति के मतदाताओं की करवट ने भगवा खेमे के चारो ओर एक मजबूत आवरण तैयार कर दिया है। जिसे भेदना भविष्य में भी अन्य दलों के लिए चुनौती होगा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार चुनाव में सुशासन और राशन के प्रयोग ने बसपा के नींव कहे जाने वाले इन मतदाताओं का मूड बदल दिया। बसपा की ओर से बेहतर प्रत्याशी न लाना भी इस वोट को भगवा खेमे की ओर ले गया।
खागा विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति के मतदाता सबसे अधिक हैं। ये वोट आमूमन बसपा को जाता है। पूर्व के चुनावों में ऐसा ही होता रहा लेकिन साल 2017 फिर 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा का यह कैडर वोट करवट लेता दिखा। आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2017 में भाजपा प्रत्याशी कृष्णा पासवान को 94892 वोट मिले थे।
जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी ओम प्रकाश गिहार को 38393 और बसपा उम्मीदवार सुनील कुमार को 38318 वोट मिले थे। वहीं 2022 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी कृष्णा पासवान को 83735 वोट मिले। वहीं सपा प्रत्याशी रामतीर्थ परमहंस को 78226 वोट मिले, जबकि बसपा प्रत्याशी दशरथ लाल सरोज को मात्र 22115 वोट मिले। यानी पिछली बार से करीब 16 हजार वोट कम मिले। जो साफ इस बार की ओर इशारा कर रहा है कि बसपा का कैडर वोट पर अब भगवा रंग चढ़ गया है।
सियासी पंडितों के अनुसार बसपा की चुनावी तैयारी जिले में महज औपचारिकता निभाती लगी। प्रत्याशी घोषणा व नामांकन के बाद जनपद में किसी बड़े नेता का दौरा नहीं हुआ। इतना ही नहीं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी नहीं देखी गई। जिससे बसपा का कैडर वोट बिखर गया। बसपा की ओर से यह चुनाव महज खानापूर्ति के लिए लड़ा गया।