शासन से रोक के बावजूद जिला स्तर पर आवंटित मौरंग पट्टे के मामले में सोमवार को सीबीआई टीम पहुंची। सीबीआई ने करीब चार हजार पेज की 59 फाइलों के अहम दस्तावेजों को खंगाला। खनन विभाग और डाकबंगले में सीबीआई पट्टों की गहन छानबीन में जुटी रही।
यह मामला तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के कार्यकाल का है। मामले में तत्कालीन डीएम अभय निलंबित किए गए थे। यहां के दो पट्टेधारकों पर सीबीआई ने केस दर्ज किया था और ईडी टीम ने जांच शुरू की थी।
यह अवैध खनन का मामला बसपा सरकार के समय हुए यमुना नदी किनारे मल्लाह बिरादरी के जीवकोपार्जन के लिए पट्टा किए जाने से जुड़ता है। असोथर वार्ड जिला पंचायत सदस्य सुखराज निषाद को कोर्रा कनक और गुरुवल मौरंग खंड के पट्टे हुए थे। इनके पट्टों को सपा सरकार में शासन के बिना किसी निर्देश के रिनुवल कर दिया गया था।
बीजेपी सरकार आने पर 2017 में अवैध तरीके से किए गए पट्टों की जांच हुई। सीबीआई की जांच के दौरान पट्टे अवैध माने गए। जांच के दौरान सीबीआई ने लखनऊ कार्यालय में पट्टेधारक सुखराज निषाद और शहर के शिव सिंह चौहान सेवानिवृत्त फौजी पर एफआईआर दर्ज की थी।
पट्टों का रिनुवल तत्कालीन डीएम अभय ने किया था। जांच के दौरान बुलंदशहर की तैनाती के दौरान अभय के आवास में ईडी ने छापामारी की थी। ईडी ने इन पट्टेधारकों से भी वसूली का नोटिस दिया था। आईएएस अभय पर कार्रवाई की गई थी। अब चौथी बार सीबीआई जिले में अवैध पट्टों की जांच को पहुंची है।
सीबीआई टीम अचानक खनन कार्यालय पहुंची। यहां पट्टे संबंधित अब तक की जांच और पुराने रिकार्ड चार घंटे तक खंगाले। सारे रिकार्ड डाक बंगले लेकर गई है।
सीबीआई ने खनन अधिकारी और तत्कालीन कर्मचारियों से भी लंबी पूछताछ की है। सूत्रों के मुुताबिक कई लोगों से पूछताछ के लिए सीबीआई बुला सकती है। मामले की जांच तीन साल हो रही है।
सपा शासन काल में पट्टे का रिनुवल तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के इशारे पर किए जाने का साक्ष्य भी सीबीआई के हाथ लगे हैं। सीबीआई के निरीक्षक संदीप गौतम टीम के साथ पहुंचे हैं। उनका कहना है कि मामले जांच के बाद ही कुछ बताया जा सकता है। मामला हाल में ही उनके पास स्थानांतरित हुआ है।
जिले में एक बार फिर अवैध मौरंग पट्टों की जांच को सीबीआई आ धमकी है। मौरंग पट्टे भले ही सुखराज निषाद के नाम पर थे लेकिन इनका मौरंग कारोबारी के रूप में चर्चित पूर्व विधायक और जिले के कई दिग्गज पट्टों की कमान संभाल कर रखते थे। हालांकि सीबीआई जांच में सिर्फ पूछताछ के दायरे में आए थे।
बसपा सरकार ने मौरंग का पट्टा जिला पंचायत सदस्य सुखराज निषाद को किया था। सुखराज ने सपा शासन काल में पट्टा संचालन का प्रार्थना पत्र उनके द्वारा करने में असमर्थता जताई थी।
तभी माफिया की रणनीति के तहत शिव सिंह चौहान रिटायर्ड फौजी को पावर ऑफ अटार्नी कराई गई थी। उस समय बांदा के एक पूर्व विधायक ने अपरोक्ष रूप से पट्टों का संचालन शुरू किया था। उन्होंने जिले के एक मौरंग माफिया को शामिल किया था।
मौरंग पट्टाधारक सुखराज निषाद करीब दो साल तक अंडरग्राउंड हो गए थे। इधर, खनन का जबरदस्त खेल हुआ। इस तरह से पट्टेधारक एक मोहरा बनकर रहे। उसके बाद पट्टों में कई बड़े साझेदार जुटे थे।
कई और मौरंग पट्टे हुए। सिंडीकेट की नजर मे जिले के मौरंग पट्टे आए थे। सिंडीकेट के तार जुड़ने के बाद मौरंग खनन की दिशा और दशा ही बदल गई थी।
को करीब दो-एक माफिया ने खदान में नदी पर पुल ही बना डला था। मामला पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के संज्ञान में पहुंचा था। उन्होंने तत्कालीन कमिश्नर, डीएम से लेकर कई अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की थी।