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सीबीआई ने आंका पट्टा फाइलों के नवीनीकरण में झोल

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फतेहपुर। सपा शासन काल में मानकों को ताक पर रखकर किए गए मौरंग पट्टों के आवंटन की जांच मंगलवार को सीबीआई टीम ने की। उसे नवीनीकरण में झोल नजर आ रहा है। सीबीआई ने खनन अधिकारी को सुबह डाक बंगला बुला लिया। उसके बाद खनन ऑफिस के बाबू फाइलों को ढोते रहे। टीम दस्तावेजों की गहन जांच के बाद जल्द खनन से जुड़े पट्टाधारकों और सिंडीकेट तक पहुंच सकती है।
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दिल्ली की सीबीआई टीम महीने के शुरूआत में खनन अधिकारी मिथिलेश पांडेय को अवैध मौरंग पट्टों के मामले को लेकर तलब किया था। पट्टों की जांच 2017 से चालू हुई थी। पहले जांच सीबीआई की दूसरी टीम कर रही थी। जांच अधिकारियों के बदलने से जांच नए सिरे से चालू की गई है। नौ अगस्त को अमर उजाला ने सीबीआई के फिर से आने की संकेत मिलने की खबर प्रकाशित की थी। जिसके बाद सोमवार को टीम आई है। डाकबंगले में टीम रुकी है।
खनन अधिकारी मिथिलेश पांडेय को टीम ने सुबह करीब दस बजे बुला लिया। उसके बाद हजारों पेज की पत्रावलियों की जांच शुरू की गई। जुड़े तमाम दस्तावेज खनन ऑफिस से मंगवाए गए। टीम फील्ड पर नहीं निकली। तीन सदस्यीय सीबीआई टीम मामले में कुछ बोलने को तैयार नहीं हुई। मौरंग पट्टों को लेकर पिछले माह तत्कालीन डीएम अभय सिंह, पट्टा धारकों असोथर के सुखराज निषाद, हरिहरगंज के शिवकुमार पर सीबीआई ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। सपा सरकार में 2012 से 2016 के बीच सुखराज निषाद, शिवकुुमार के आवेदित नवीनीकरण के मौरंग पट्टों की जिला प्रशासन ने संस्तुति की थी। हाईकोर्ट ने नवीनीकरण पर रोक लगाई थी। मामले में प्रशासन के पास कई साल तक नवीनीकरण की फाइल सुरक्षित रही है। नवीनीकरण के आवेदन की फाइल 2009-10 से विभाग को आवेदित रही हैं। सपा शासन काल में अचानक पट्टा फाइल कैसे और किस सिस्टम के तहत अधिकारियों के टेबल तक पहुंची। जिस पर सीधे उनके संचालन की जिलाधिकारी ने मुहर लगा दी। टीम इसकी जांच कर रही है।
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