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धनतेरस में साढ़े चार करोड़ का हुआ कारोबार

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फतेहपुर। धनतेरस पर लोगों ने जमकर खरीदारी की। सुबह से ही बाजार गुलजार रहे। शाम को चौक में लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल भरा रहा। धनतेरस पर जिले में करीब साढ़े चार करोड़ का अनुमानित कारोबार हुआ। इसमें सोना, चांदी, बर्तन, बाइक, चार पहिया वाहन की लोगों ने खरीदारी की।
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सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष पप्पन रस्तोगी ने बताया कि पिछले साल से तीस फीसदी व्यापार में मंदी रही है। दो करोड़ रुपये का सराफा का व्यापार हुआ है। वहीं बाइक एजेंसी मालिक वीरेंद्र सिंह पटेल ने बताया कि करीब दो करोड़ रुपये का बाइकों का व्यापार हुआ है। एजेंसी मालिक प्रवीण सिंह ने बताया कि जिले में करीब पंद्रह सौ
बाइक बिक गई। बर्तन व्यापारी राधेश्याम हयारण का कहना है कि धनतेरस में करीब दस लाख रुपये का कारोबार हुआ है। इलेेक्ट्रानिक व्यापारी मो. अंजुम का कहना है कि अनुमानित करीब चालीस लाख रुपये का कारोबार इलेक्ट्रानिक क्षेत्र में हुआ है। बाजार में गट्टा, पट्टी, लाई की दुकानें भी सजी रहीं। शाम को चौक व देवीगंज बाजार में
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लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वहीं मंदिरों में भक्तों ने पूजा अर्चना की। हनुमान मंदिर व जानकी मंदिर में भी लोग शाम को पूजा अर्चना करने पहुंचे। बाजार में फुटपाथ पर लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाओं के अलग से स्टाल लगाए गए हैं। बाजार का नजारा उत्सव जैसा रहा। दीपावली का पर्व उल्लास पूर्वक मनाने के लिए लोग बाजार में खरीदारी शुरू कर दी है। बाजार में लोगों की भीड़ व बिक्री को लेकर एक-एक दुकान में कई लोग लगे हुए थे।
दुकानों पर मूर्तियों की खरीदारी भी हुई। लक्ष्मी, गणेश की नई मूर्ति के साथ लोग पूजा-अर्चना करते हैं। शहर के चौक, पीलू तले, रोडवेज, पत्थरकटा चौराहा, देवीगंज, हरिहरगंज, राधानगर, पक्का तालाब में लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं की बिक्री के लिए स्टाल लग गए हैं। इन स्टालों पर पहुंचकर लोगों ने अपनी श्रद्धा व क्षमता के अनुसार लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा खरीदी।
धनतेरस के दिन सोने और चांदी का आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है। इसमें महिलाओं की खास पसंद सोने से बनी जेवर ही होते हैं। सराफा बाजार खुलते ही दुकानों में भीड़ जमा हो गई। महिलाओं ने सोने के आभूषणों के अलावा सोना-चांदी के सिक्के खरीदे।
धनतेरस पर्व पर महिलाओं व बच्चों ने अपने घर के आंगन व लॉन में रंगोली बनाई। घर के मुख्य स्थान पर हल्दी व कुमकुम से स्वास्तिक व अन्य मांगलिक चिन्ह बनाए। शाम को पूरे घर में दीपक सजाएं और प्रदेष काल में भगवान धनवंतरि और धर्मराज यम की पूजा की।
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