फतेहपुर। भले ही सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ रैन बसेरा की सेवाओं की टोह लेने को निकल रहे हैं। पर, यहां सुविधाओं का टोटा है। यहां बनाए गए दो अस्थाई रैन बसेरा के इंतजाम शुक्रवार को हाशिए पर नजर आए। तंबू और कनात से बने रैन बसेरा खुद ठंड से गीले हो रहे हैं।
यहां कड़ाके की ठंड से बचने को दिए गए उपाय नाकाफी हैं। शीतलहरी के झोंके यहां पहुंचने वाले जरूरतमंदों को और बेहाल कर रहे हैं।
करीब 29 लाख की आबादी के बीच जिला मुख्यालय में केवल दो अस्थायी रैन बसेरा खुले हैं
। रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन में बनाए गए रैन बसेरों में लोग रात गुजारने से कतराते हैं। वही रुक रहे हैं जिनके पास दूसरा कोई ठौर रहीं। आदर्श रेलवे स्टेशन से रोजाना हजारों लोग अप-डाउन करते हैं। शुक्रवार की सुबह सवा 11 बजे यहां बने रैन बसेरा में 10 गद्दे और 11 रजाई मिले।
रैन बसेरा की रखवाली करने वाले समीर ने बताया कि इतने ही बिस्तर की व्यवस्था है। रात में इतने ही लोग रुकने को आते हैं। ज्यादातर लोग कॉमन हॉल में जाकर सो जाते हैं। अगर इस रैन बसेरा की सुविधाओं और कॉमन हाल की तुलना करे तो कॉमन हाल ज्यादा मुफीद है।
ज्वालागंज चौराहा स्थित रोडवेज बस स्टाप में दूसरे रैन बसेरा में साढ़े 11 बजे एक भी बिस्तर नहीं था। एक व्यक्ति एक किनारे खुद के एक पतले कंबल में दुबका नजर आया। एक अन्य व्यक्ति पूछताछ केंद्र के पास ठंड से ठिठुरता मिला। पूछने पर खुद का नाम राजू बताते हुए कहा कि भीख मांगकर पेट पालता है। ठंड लगने से वह रैन बसेरा में रुकने गया था। वहां के हाल देखकर लौट रहा है।
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अस्पताल के रैन बसेरा में ताले
फतेहपुर। जिला अस्पताल के रैन बसेरा ताले के कैद से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। अक्सर यह ताले में जकड़े रहते हैं। नतीजा तीमारदार वार्ड और उसके इर्दगिर्द रात गुजारने को मजबूर हो रहे हैं। अस्पताल प्रशासन केवल यह कहकर खामोश हो जाता है कि जब कोई तीमारदार रुकने की बात करता है तो उसके लिए ताला खुलवाया जाता है। सीएमएस डॉ. रेखारानी का कहना है कि ज्यादातर तीमारदार अपने मरीज के पास ही रात में रुकना चाहते हैं।