नोट बंदी के 24 वें दिन भी शुक्रवार भी नए और चलन वाले नोट पर्याप्त मात्रा में बैंक और डाकघरों को उपलब्ध कराए जाने का काम नहीं हो सका। नतीजा लाइन में लगे ज्यादातर लोग खाली हाथ घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं। चौबीस घंटे की सेवाएं देने वाले कम से कम आधी बैकों के एटीएम मौजूदा समय में डिब्बा बन चुके हैं। चालू एटीएम महज कुछ घंटे रुपया निकालने के बाद खाली हो जा रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के ग्राहकों को उठानी पड़ रही है। इन बैंकाें में कई कई दिन रुपया बंटना बंद हो जाता है। उधर, नोट संकट से कुछ हद तक अपने स्तर से उबरने को गृहणियां गृहस्थी की चीजों में थोड़ी-थोड़ी कटौती कर घर की गाड़ी चलाने का काम कर रही हैं।
फतेहपुर। पांच सौ और हजार के नोट बंद होने से लोग परेशान हैं। जेब में जिनती रकम पहुंचती है उससे कहीं ज्यादा की दरकार होने से बजट डगमगा कर रह गया है। एक दिन में रुपये देने की सीमा तय होने से हर शख्स को चार-पांच दिन में बैंक और डाकखाना की लाइन में लगना पड़ रहा है। ऐसे में बैंकों और डाकखानों से लाइन कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शुक्रवार को भी शहर की बैंकों में कतारे देखने को मिलीं। एसबीआई, पीएनबी, बॉब, विजया बैंक, बीओआई, केनरा जैसी बैंक में भुगतान को आए तमाम लोग मायूस दिखे। बीओबी रुपया निकालने गई बाकरगंज की रुबीना के चेहरे में छायी मायूसी की वजह कैश विंडो पहुंचने से पहले कैश खत्म हो जाना रहा। ऐसा ही इलाहाबाद बैंक पहुंचे सौरभ के साथ भी हुआ।
फतेहपुर। नोट बंदी ने एटीएम सेवा की उपयोगिता पर सबसे ज्यादा सवाल खड़े किए हैं। ज्यादातर एटीएम काम नहीं कर रहे हैं। लोग इस बूथ से उस बूथ के चक्कर काट रहे हैं। इसके बावजूद रुपया नहीं मिल पा रहा है। दोपहर होने से पहले अधिकांश एटीएम खाली डिब्बा बनकर रह जाते हैं। कई बैंकाें ने तो बकायदा मशीन काम न करने की तख्ती लिखकर टंगवा दी है। एसबीआई के एटीएम में पैसा न निकलने से सेवानिवृत शिक्षक रामजीत मायूस हो गए। बताया कि शहर के पांच एटीएम से घूम कर आए हैं। उम्मीद थी कि यहां निराश नहीं होना पड़ेगा, पर लगता है कि सारी बैंकों का एक सा हाल है।
फतेहपुर। नोट बंद होने का असर सबसे ज्यादा गृहणियों पर पड़ा है। इन्हें सही मायने में आटा और दाल का भाव अब पता लग रहा है। यही वजह है कि यह इससे उबरने के लिए बचत का रास्ता अख्तियार कर रही हैं। रेलवे स्टेशन रोड की सुनीता का कहना है कि हर महीने घर चलाने पर करीब 15 हजार रुपया खर्च होता है। नए नोट न अभी तक बैंकाें में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध न कराए जाने से हाथ सिकोड़ कर खर्च चलाना पड़ रहा है। जो सरसो का तेल महीने में तीन किलो खप रहा था उसे घटाकर ढाई किलो कर दिया है। शक्कर भी चार किलो के बजाय तीन किलो खरीद कर ला रही हूं। ऐसा ही कुछ तरीका ज्वालागंज की राधिका ने अपनाकर घर की गाड़ी को ढर्रे पर लाने का काम कर रहीं हैं। बकौल राधिका, उनके पति गैर प्रांत में नौकरी करते हैं। हर महीने पैसा भेजते हैं। एक महीने से पैसा नहीं भेज पाए हैं। ऐसे में उन्होेंने रोज रोज दाल पकाने के बजाय सप्ताह में तीन दिन चुन लिए हैं। जिस दिन दाल पकती है उस दिन सब्जी नहीं पकती।
बिंदकी। नोट के लिए लोग क्या-क्या नहीं कर रहे हैं। बिंदकी के स्टेट बैंक आफ इंडिया के एटीएम में लगी लंबी लाइन तोड़कर मुंह ढंके पहुंची युवती आगे लगने पहुंच गई। कुछ लोगों ने एतराज जताने पर खुद को डीआईजी की बेटी कहकर अरदब में लेना चाहा। इस लाइन में लगे एक पुलिस कर्मी को यह नागवार गुजरा और उसने खरीखोटी सुनाकर युवती को नंबर से लगकर पैसा निकालने की नसीहत दी। इससे युवती भड़क गई। वह कोतवाली पहुंच गई और एटीएम में एक पुलिस कर्मी पर बेइज्जती करने का आरोप लगाया। यहां पर भी युवती खुद को डीआईजी की बेटी बताती रही। कोतवाल आरके सिंह ने एटीएम चलकर पुलिस कर्मी को इंगित कराने को कहा तो युवती पलट गई और बिना कोई तहरीर दिए चली गई।
फतेहपुर। जिले में ज्यादातर सरकारी कर्मचारियों को पांच तारीख के बाद सेलरी हाथ पर लगती है। ऐसे में इस तारीख से बैंकाें में सरकारी कर्मचारियों की लाइन बढ़ सकती है। विकास भवन के अफसरों को सात से दस तारीख के बीच सैलरी मिलती है। विद्युत विभाग के कर्मचारियों को 10 से 15 तारीख के बीच सेलरी मिलती है। शिक्षा विभाग के कर्मचारी आठ से 10 तारीख के बीच इसके हकदार होते हैं। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के हाथ में भी 10 तारीख तक तनख्वाह आ जाती है। सीएमओ डॉ. विनय कुमार पांडेय कहते हैं कि पांच दिसंबर तक तनख्वाह मिल सकती है। बिल फाइनल कर ट्रेजरी भेजा जा चुका है।