फतेहपुर। अगर आप अपने दोपहिया या चार पहिया वाहनों में वीआईपी नंबर लिखवाने के शौकीन हैं तो आपके लिए खुशखबरी है। जिले में वीआईपी नंबरों की नीलामी व्यवस्था बंद कर दी गई है। अब वीआईपी नंबरों को चार श्रेणी में विभाजित कर उनका शुल्क तय हो गया है। अब वाहन स्वामी अपने बजट और अपनी पसंद के मुताबिक मनचाहा नंबर ले सकता है।
दरअसल जनपद में वीआईपी नंबरों की ऑनलाइन बुकिंग, बिक्री और इस माध्यम से शौकीनों से अधिक से अधिक राजस्व वसूलने के लिए संभागीय परिवहन विभाग में नीलामी व्यवस्था शुरू की गई थी। इसमें वीआईपी नंबर के लिए ऑनलाइन सर्वाधिक बोली लगाने को वीआईपी नंबर दे देने की व्यवस्था थी। तकरीबन तीन महीने तक चली इस व्यवस्था में जिले के किसी भी शख्स ने वीआईपी नंबर के लिए बोली नहीं लगाई। इससे नीलामी व्यवस्था धड़ाम हो गई। अब इस व्यवस्था को बदलकर वीआईपी नंबरों को चार श्रेणी में विभाजित कर दिया गया है। हर श्रेणी के वीआईपी नंबर की अलग-अलग फीस तय की गई है। भुगतान कर अब कोई भी वाहन स्वामी वीआईपी नंबर ले सकता है।
इस तरह से विभाजित की गई है श्रेणी
फतेहपुर। परिवहन आयुक्त धीरज साहू ने वीआईपी नंबरों को चार श्रेणी में विभाजित किया है। जिसके तहत एक से नौ तक संख्या, 786 और 1111 से 9999 तक की डिजिट की सिरीज को प्रथम श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में नंबर लेने के लिए दोपहिया वाहन स्वामियों को बीस हजार और चार पहिया वाहन वालों को एक लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
दूसरी श्रेणी में दो नंबर से तीन नंबर एक तरह के मिलेंगे। इसमें 10, 11, 22, 100, 111, 2000, 1100 जैसी डिजिट शामिल की गई हैं। इस श्रेणी में नंबर लेने के लिए दोपहिया वालों को दस हजार और चार पहिया वालों को पचास हजार रुपये देने होंगे।
तीसरी श्रेणी में दो नंबर में नौ का जोड़ मिलेगा। जैसे 18, 27, 63, 101, 214, 909, 2100, 2002, 8055 है। इन नंबरों के लिए दोपहिया वालों को पांच हजार और चार पहिया वालों को पच्चीस हजार रुपये का भुगतान करना होगा।
चौथी श्रेणी में दो डिजिट एक जैसे होंगे। इसमें 20, 30, 202, 303, 9090, 5511, 7711, 3535, 5588 जैसे नंबर शामिल हैं। इसके लिए दो पहिया वाहनों को तीन हजार और चार पहिया पहिया वाहनों को पंद्रह हजार रुपये देने होंगे।
गत दिसंबर माह में छह गाड़ियों को वीआईपी नंबर देकर 1.98 लाख रुपये का राजस्व वसूल किया है। अलग-अलग व्यापारियों के लिए अलग-अलग रेट निर्धारित कर दिए गए हैं। जिससे अब वीआईपी नंबर में रेट ऊपर या नीचे होने की समस्या नहीं रहेगी। लोग निर्धारित रकम का भुगतान करके वीआईपी नंबर ले सकते हैं। अरविंद त्रिवेदी, एआरटीओ प्रशासन