फतेहपुर। संचारी रोग नियंत्रण अभियान का दारोमदार आशा कार्यकर्ताओं पर निर्भर है। गंभीर बीमरियों का चिकित्सीय परामर्श से लेकर जिला अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी भी आशा कार्यकर्ता के कंधों पर है। ये महिलाएं एमबीबीएस डॉक्टर की जिम्मेदारी निभा रही हैं।
संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत आशाकार्यकर्ताओं को अपने क्षेत्र के एक-एक घर जाना है। दिमागी बुखार के कारण और उसके बचाव के बारे जानकारी देना है। वे बुखार, इन्फ्लुंजा रोगी, क्षय, कुपोषित बच्चे, कुष्ठ, फाइलेरिया समेत कई रोगों की पहचान करके रोगियों की सूची बनाएंगी। इसके अलावा घरों में चूहा, छछूंदरों से होने वाली बीमारी के विषय में परिवारों को प्रशिक्षत भी करेंगी। वे हीट वेव के मरीजों की भी पहचान करके बीमारी के प्रति लोगों को एक्सपर्ट की भांति जागरूक करेंगी। ऐसे रोगियों की पहचान करके नजदीकी सरकारी अस्पतालों में उपचार की सलाह देने के साथ एंबुलेंस से पहुंचाएंगी। इन कार्यकर्ताओं से लिए जाने वाले कई कार्य एमबीबीएस डॉक्टर के हैं। इसमें संचारी रोग नियंत्रण अभियान में मच्छरजनित मरीजों की पहचान भी शामिल हैं। ऐसे में संचारी रोग अभियान भी सिर्फ कागजों पर ही पूरा होगा।
सभी आशा कार्यकर्ताओं को एक प्रोफार्म दिया गया है। उसमें संबंधित बीमारियों की जानकारी लिखकर दी गई है। उन्हें प्रशिक्षण भी दिया गया है। वे घर-घर जाकर उसी प्रोफार्म के तहत लोगों को जानकारी दे रही हैं और लक्षणों की पहचान कर रही हैं।
डॉ. इश्तियाक अहमद, एसीएमओ, फतेहपुर