उद्योग विभाग के अधिकारियों में हलचल तेज हो गई है। इसलिए अब औद्योगिक क्षेत्र के एक-एक भूखंड की जानकारी जुटा रहे हैं। आवंटन से लेकर निरस्त तक की प्रक्रिया के शासनादेश खंगाल रहे हैं और नोटिस देकर अपनी कलम बचाने का काम शुरू कर दिया है। औद्योगिक क्षेत्र के विकसित होने के 30 साल बाद कागजी प्रक्रिया शुरू करना विभाग के कार्यों को कटघरे में खड़ा कर रही है। वहीं, 30 साल बाद भी 19 भूखंडों का आवंटन नहीं हुआ हैं, जबकि नए उद्यमी उद्योग के लिए जमीन तलाश रहे हैं।
जिले के आठ औद्योगिक क्षेत्रों को लघु उद्योगों के लिए 1987 से लेकर 1992 तक विकसित किया गया। इसमें चौडगरा, जगतसराय, त्रिलोकपुरी, इटरोरा-पिलकिनी, बिंदकी के पास चकहाता, सदवापुर, सुरजही, रामपुर (थरियांव) शामिल हैं। यहां एक हजार से लेकर 11 हजार वर्ग फीटआकार के कुल 360 भूखंड और चौडगरा में 10 शेड बनाए गए। भूखंड आवंटन का सिलसिला 2012 तक चला। इसमें वर्ष 2012 में ही कैबिनेट मंत्री और तत्कालीन सांसद राकेश सचान के नाम पर आवंटित 72 भूखंड भी शामिल हैं। अब जब कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने अपने भूखंडों को निरस्त करने का निर्णय लिया। इसके बाद उद्योग विभाग हरकत में आया। उसने आनन-फानन औद्योगिक क्षेत्रों के भूखंडों की जानकारी निकाली। उनके आंवटन, डीड, उद्योग स्थापित से लेकर निरस्त होने की प्रक्रिया खंगालनी शुरू की है और नोटिस प्रक्रिया जारी की है। लेकिन उनकी 30 साल बाद प्रक्रिया शुरू करना कई सवालों के घेरे में है।
19 का आवंटन नहीं, देने होंगे ये भी जवाब
औद्योगिक क्षेत्र में जगत सराय में 1, चकहाता में 4, रामपुर में 2, सुरजही में 7 और रुद्रपुर में 5 कुल 19 भूखंडों को आज तक आवंटित नहीं किए गए हैं। 30 साल गुजरने के बाद भी भूखंड रिक्त हैं और दूसरी तरफ उद्यमी जमीन की तलाश में भटक रहे हैं। इसके अलावा आवंटन के बाद डीड क्यों नहीं की गई? राशि क्यों जमा नहीं कराई गई? पिछले 30 सालों में एक भी नोटिस क्यों नहीं भेजी गई? इनके सभी के जवाब उद्योग विभाग को देने होंगे। इन्हीं मामलों पर उद्योग विभाग की ओर से अब पूरे प्रदेश में एक सदस्यीय टीम टीम बनाई गई हैं, जो सभी औद्योगिक क्षेत्रों के जमीन आवंटन से लेकर उद्योग स्थापित तक की जानकारी एकत्र करेगी। फतेहपुर में उद्योगों की जांच करने के लिए प्रयागराज से सहायक आयुक्त उद्योग जयश्री को भेजा गया है। इसी तरह जिले के उपायुक्त अंजनीश प्रताप सिंह को प्रयागराज की जांच सौंपी गई है। एक सदस्यीय टीम को 25 फरवरी तक अपनी-अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। वहीं, जिले में लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष सतेंद्र सिंह की मांग पर दो सदस्यीय टीम भी गठित की गई है। इसमें उपायुक्त उद्योग अजय चौरसिया और सहायक आयुक्त संध्या को मामले की जांच सौंपी गई है।
30 दिन के भीतर करनी होती है डीड
उद्योग विभाग के नियमानुसार, भूखंड आवंटन के 30 दिन के भीतर डीड (अनुबंध) करना होता है। इस बीच भूखंड की 10 प्रतिशत राशि भी जमा करनी होती है। छह महीने के भीतर उद्योग स्थापित करने का नियम है। लेकिन इन सभी नियमों को उद्योग विभाग ने दरकिनार किया। भूखंड आवंटन तो किए लेकिन आगे की प्रक्रिया को बढ़ाने में रूचि नहीं दिखाई। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि उद्योगों को लगाने में जिला पिछड़ा और उद्योग विभाग के राजस्व की क्षति भी हुई। 2014 के रिवाइस के बाद जमीन का रेट 3 हजार रुपये वर्ग मीटर से भी ज्यादा हो गया है। ऐसे में इन भूखंडों को बढ़ी कीमत पर लेने के लिए भी उद्यमी तैयार नहीं हो रहे हैं।
5 मई 2012 की उद्योग बंधु की बैठक में तत्कालीन डीएम कंचन वर्मा की अध्यक्षता में मेरी दो संस्था के नाम पर दो स्थानों पर भूखंड आवंटन का निर्णय लिया गया। 11 मई 2012 को भूखंड आवंटित भी कर दिए गए, लेकिन संस्थाओं को आवंटन संबंधी एक भी रजिस्टर्ड पत्राचार कर जानकारी नहीं दी गई। मुझे जानकारी मिलने के बाद उद्योग विभाग से 15-16 फरवरी 2022 को एक पत्राचार के माध्यम से डीड बनाने को लेकर पूरी जानकारी दी गई। मैंने अपनी संस्था के नाम के भूखंडों को निरस्त करा दिए हैं। मैंने कैबिनेट मंत्री बनने के बाद पहली बैठक में ही स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आवंटित भूखंडों में उद्योग नहीं लगे हैं, तो उद्योग के लिए प्रेरित करें। वरना एक महीने में निरस्त की कार्रवाई करें। उद्योग विभाग को समय पर सभी आवंटितों को सूचना देनी चाहिए थी या जमीन रिक्त करानी चाहिए थी।- राकेश सचान, कैबिनेट मंत्री, उप्र