जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। चार दिन पहले सलेमाबाद गांव के एक युवक की मौत के बाद बुधवार रात असोथर कस्बे की एक महिला की भी डेंगू से मौत हो गई। वह कानपुर के फार्च्यून नर्सिंगहोम में भर्ती थी। इसके अलावा असोथर कस्बे का ही डेंगू पीड़ित युवक कानपुर के उर्सला अस्पताल में सप्ताह भर से भर्ती है।
असोथर कस्बे के किलापर के रामबाबू सविता की पत्नी सीमा (32) को सप्ताह भर से बुखार आ रहा था। पहले जांच में टाइफाइड निकला था। हालत में सुधार न होने पर परिजनों ने उसे मंगलवार को कानपुर के एक नर्सिंगहोम में भर्ती कराया। बुधवार को नर्सिंगहोम की ओर से कराई गई जांच में महिला को डेंगू निकला। बुधवार रात ही प्लेटलेट्स काफी कम हो जाने से उसकी मौत हो गई।
इससे पहले सलेमाबाद के ननकाई नामक युवक को डेंगू की पुष्टि कानपुर के हैलट अस्पताल में हुई और वहीं पर इलाज के दौरान उसकी मौत हुई थी। दूसरी ओर असोथर के ही थरियांव तिराहा मोड़ पर रहने वाले मनोज बाजपेई के युवा बेटे आदर्श को बुखार आने पर एक सप्ताह पहले कानपुर के उर्सला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
वहीं डेंगू की पुष्टि हुई। उसकी हालत में भी सुधार नहीं है। कस्बे के महामाया सिंह, अंकुर सिंह, राजेश कुमार का कहना है कि पिछले महीने से लोग बुखार समेत कई बीमारियों से जूझ रहे हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं टूट रही है।
इस बाबत संक्रामक सेल के हेड डॉ. रमाकांत का कहना है कि डेंगू का खतरा सितंबर से शुरू होता है। कानपुर और लखनऊ में भले ही डेंगू निकल रहा हो, लेकिन इस जिले में ऐसा नहीं है, फिर भी असोथर पीएचसी की संक्रामक टीम को प्रभावित बस्ती में भेजकर पड़ताल कराई जाएगी।