जिले के खागा क्षेत्र में मवेशियों को अगवा कर मनचाही फिरौती वसूलने का खेल चल रहा है। जानकारी पुलिस को भी है लेकिन उसकी चुप्पी इन दबंगों के हौसले बढ़ा रही है। दूसरी ओर, लुटे ग्रामीण अपने दुधारू जानवरों के बदले मांगी जा रही फिरौती की रकम में कुछ कमी कराकर जानवर छुड़ाने को मजबूर हैं। दबंगों के इस खेल में इनका साथ इलाके के कुछ दलाल भी दे रहे हैं। सौदा तय कराने में उन्हें कमीशन दिया जा रहा है। यही वजह है कि चाह कर भी ग्रामीण इन दबंगों का विरोध नहीं कर पाते और फिरौती के इस खेल में पिस रहे हैं।
14 मार्च को रारी गांव के किसान शिव बहादुर सिंह घर में सो रहे थे। कुछ ही देर पहले अपनी दुधारू भैंस को चारा-पानी लगाकर आए थे। भोर में भैंस की आवाज नहीं सुनाई दी, तो उसे देखने निकले। भैंस और उसे बांधने वाला पगहा दोनों नहीं थे। शिव बहादुर ने सोचा कहीं आसपास खेत में निकल गई होगी।
तलाश शुरू की लेकिन भैंस नहीं मिली। तभी गांव के ही एक शख्स ने बताया कि उसकी भैंस नटों का डेरा के पास एक जगह बंधी है। शिव कुमार पूछते हुए वहां पहुंचे, तो दो युवकों ने रोक लिया। बोले, यह भैंस तो तभी मिलेगी जब चार हजार रुपये दोगे।
विवाद हुआ, लेकिन हल नहीं निकला। पुलिस के पास पहुंचे, तो पुलिस ने दरखास्त लेकर चलता कर दिया। एक दिन और बीता तो शिव कुमार को चिंता हुई, कहीं भैंस से हाथ न धोना पड़े। लिहाजा चार हजार रुपये देकर भैंस घर ले आए।
यह तीन मामले तो बानगी भर हैं। केवल फरवरी से अप्रैल तक कई किसान मवेशी अगवा करने वाले दबंगों का शिकार हो चुके हैं। पलवाहार गांव के छैला, मोहरियापुर के महादेव ने भी फिरौती देकर अपने दुधारू जानवरों को छुड़ाया।
क्षेत्र के पचीसापर, खैरई, लाखीपुर, खंतवा, नेंदौरा, नटों का डेरा गांवों में मवेशी उठा ले जाने वाले बदमाश दुधारू मवेशियों को रात के अंधेरे में अपने ठिकाने में पहुंचा देते हैं। मवेशी पालक एक दो दिन में तलाश करते-करते मवेशी उठा लेने वाले बदमाशों के पास पहुंचता है।
मवेशी पहचानने के बाद उसके सामने फिरौती की रकम रख दी जाती है। मवेशी पालक फिरौती देकर अपने मवेशी घर ले आते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मवेशी चोरी की घटनाओं की रिपोर्ट पुलिस दर्ज नहीं करती, केवल प्रार्थना पत्र ले लिया जाता है।