फतेहपुर। ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड में शामिल गैंग के एक गुर्गे को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि धोखाधड़ी का पूरा नेटवर्क नेपाल से संचालित किया जा रहा था। पुलिस अब गैंग के अन्य सदस्यों की वर्चुअल आईडी खंगालकर जांच में जुटी है। कोर्ट के आदेश पर आरोपी को शुक्रवार को जेल भेज दिया गया। गैंग ने जिले के आठ से अधिक युवकों को शिकार बनाया था।
गाजीपुर थाने के शाह निवासी अंकित कुमार ने 10 अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि अक्तूबर 2025 में उसकी पहचान बांदा जिले के दो-तीन लोगों से हुई थी जिन्होंने उसे एक ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट से जोड़ा। इसके बाद उसके साथ गांव के हर्षित गुप्ता, रोहित शुक्ला, सत्यम गुप्ता, विवेक शुक्ला, सुधीर शुक्ला, आनंद शुक्ला और बांदा के कृष्णा तिवारी को भी इसमें शामिल कराया गया।
तीन अक्तूबर 2025 से मार्च तक अलग-अलग तिथियों में करीब 10 लाख रुपये विभिन्न खातों में निवेश कराए गए। वेबसाइट पर लगभग आठ लाख रुपये का बैलेंस दिखाया गया। रकम निकालने के प्रयास पर संपर्क नंबर ब्लैक लिस्ट कर धोखाधड़ी की गई।
साइबर क्राइम पुलिस ने जांच के बाद बांदा के नरैनी थाने के नेढुआ निवासी विवेक कुमार को शुक्रवार को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने बताया कि 2024 में फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिये नेपाल के एक व्यक्ति से संपर्क हुआ था जो गूगल प्लेटफॉर्म पर कूटरचित ऑनलाइन गेमिंग लिंक अपलोड करता था। निवेश पर 15 से 30 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था।
धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा गया। आरोपी ने बताया कि वह तहसील स्तर पर करीब 45 एजेंटों के जरिये नेटवर्क चला रहा था और गल्ला व्यवसाय में भी रकम का इस्तेमाल करता था। साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक मो. कमर खान ने बताया कि आरोपी के पास से दो एंड्रायड मोबाइल, एक कार और सात हजार रुपये नकदी बरामद की गई है।
उन्होंने बताया कि नेटवर्क का मास्टरमाइंड नेपाल का वर्चुअल नंबर इस्तेमाल कर पहचान छिपा रहा है। धोखाधड़ी में व्हाट्सएप के जरिये क्यूआर कोड भेजकर लेनदेन कराया जाता था। साइबर पुलिस ने जांच में करीब 20 बैंक खातों की पहचान की है। इनमें 4,87,737 रुपये की रकम को होल्ड कराया गया है। पुलिस पूरे नेटवर्क और अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।
फोटो-31-साइबर थाने में पकड़ा गया ऑन लाइन गेमिंग का आरोप विवेक। स्रोत: पुलिस