फतेहपुर। अमृत योजना के तहत शहर में बने अधिकांश शौचालय अधूरे पड़े हैं। किसी ने गड्ढा तो किसी ने केवल दीवार बनाकर शौचालय अधूरा छोड़ रखा है।
ऐसे में लोग नालियों और सड़क किनारे शौच जा रहे हैं। शाम ढलने और भोर पहर खुले में शौच जाने वालों की लाइन लगी रहती है।
नगर पालिका अधूरे पड़े शौचालयों में अब तक चार करोड़ 24 लाख की धनराशि खर्च कर चुकी है। इसके बाद भी लाभार्थी खुले में शौच जा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने दिसंबर 2018 में अमृत योजना चालू की थी। इसके तहत शहर में 5300 लाभार्थियों को चार-चार हजार रुपये की दो किस्तों में आठ हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई थी।
आर्थिक रूप से मजबूत कुछ लाभार्थियों ने शौचालयों का निर्माण करा लिया है, लेकिन सिर्फ सरकारी मदद के भरोसे निर्माण कराने वाले गरीब लाभार्थियों के शौचालय अभी तक अधूरे हैं।
किसी लाभार्थी का सिर्फ टैंक बना है, तो किसी ने सिर्फ दीवार खड़ी करके कबाड़ भर रखा है। ऐसे में अमृत योजना गरीबों के लिए सिर्फ मजाक साबित हुई है।
अवर अभियंता सिविल अमित जायसवाल का कहना है कि अधूरे शौचालय वाले लाभार्थी सूचीबद्ध कराए जा रहे हैं। ऐसे लाभार्थियों को नोटिस जारी किया जाएगा। निर्माण पूरा न कराने वालों से दी गई धनराशि वसूल की जाएगी।
हुकुम सिंह का कहना है कि दो बार में सिर्फ आठ हजार रुपये नगर पालिका से मिले थे। इतने रुपये में सिर्फ गड्ढा तैयार हो पाया है। ऊपर शौचालय बनवाने के लिए रुपयों की व्यवस्था कर रहे हैं।
रोशन का कहना है कि गांवों में शौचालय निर्माण कराने के लिए 12 हजार रुपये दिए गए हैं, शहर में सिर्फ 8000 दिए गए हैं। इतने कम पैसे में कोई भी शौचालय का निर्माण पूरा नहीं करा सकता है।
कमलेश का कहना है कि कई बार चक्कर काटने के बाद नगर पालिका से रुपये मिले थे। गड्ढा बनाकर ऊपर किसी तरह से दीवार खड़ी कर दी है। पैसों की व्यवस्था होने पर शौचालय का निर्माण पूरा कराएंगे।
माया देवी कहती हैं कि लॉकडाउन के कारण रोजी रोजगार सब बंद हो गए थे। ऐसे में इधर-उधर से लेकर किसी तरह परिवार का पेट भरा गया है। ऐसे में शौचालय का निर्माण कहां से पूरा कराया जाता।
डीएम आवास के पीछे अधूरे पड़े शौंचालय में रखा कबाड़। संवाद- फोटो : FATEHPUR