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अनुदान में मिलेंगे कृषि यंत्र

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फतेहपुर में पिछले साल पराली जलाने में जिन गांवों के ज्यादा किसानों पर कार्रवाई हुई है। अब वहीं सरकार दरियादिली दिखाकर किसानों के दर्द पर मरहम लगाने का काम करने जा रही है।
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पंचायतीराज विभाग से आठ ग्राम पंचायतों का चयन हुआ है। इनको पांच-पांच लाख रुपये के कृषियंत्र खरीदने पर 80 फीसदी का अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए आठ ग्राम पंचायतों को कृषि विभाग से 32 लाख रुपये का फंड जारी कर दिया गया है।
ताकि ग्राम पंचायतें फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जरूरी उपकरण खरीद लें और वहां के किसान इसका उठा सकेगा।
फसलों के अवशेष जलाए जाने से बढ़ने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए फसल अवशेष पराली प्रबंधन लागू किया गया है। पिछले साल अधिक मात्रा में पराली जाने वाले और कार्रवाई के जद में आने वाले किसानों की सूची के आधार पर ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है। पहले चरण में जिले की आठ ग्राम पंचायतों को लिया गया है।
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शासन के निर्देश पर इन ग्राम पंचायतों को कृषि विभाग 80 फीसदी अनुदान पर कृषियंत्र मुहैया कराएगा। जो किसानों की फसल कटने के बाद अवशेष को नष्ट कर मिट्टी में मिलाने का काम करेंगे। फसल अवशेष पराली प्रबंधन के लिए कृषि विभाग ने चयनित ग्राम पंचायतों के खाते में चार-चार लाख रुपये भेज दिए हैं।
एक-एक लाख रुपये पंचायतों को ग्राम निधि से लगाना होगा। यानी सभी को पांच-पांच लाख रुपये के उपकरण खरीदने होंगे। हाईकोर्ट एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सख्ती के बाद सरकार ने पराली जलाने पर रोक लगा दी है। इसके लिए किसानों को जागरूक करने के साथ ही फसल अवशेष प्रबंधन की दिशा में ठोस पहल कर रही है।
योजना के लिए जिला पंचायती राज विभाग ने आठ ग्राम पंचायतों को पहले चरण में रखा है। इन ग्राम पंचायतों ने कृषियंत्र खरीदने के लिए पांच-पांच लाख रुपये का कोटेशन कृषि विभाग में जमा किया है।
तब कृषि विभाग की ओर से ग्राम पंचायतों के खातों में चार-चार लाख रुपये भेजे गए हैं। ग्राम पंचायतें पांच लाख रुपये की धनराशि से मल्चर, पैडी स्ट्राचॉपर, रिवर्सिबुल एमबी प्लाऊ, रोटरीस्लेसर, जीरोटिल सीड कम फर्टी ड्रिल को खरीद कर फसल प्रबंधन के लिए इस्तेमाल कर सकेंगी।
उपकृषि निदेशक आरपी कुुशवाहा ने बताया कि फसल काटने में कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रारीपर, स्ट्रारेक एवं बेलर को चलाया जाना जरूरी है। इसके लिए जन प्रतिनिधियों एवं किसान प्रतिनिधियों की मांग पर शासन से अब फसल अवशेष प्रबंधन के अन्य वैकल्पिक यंत्रों के इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है।
कंबाइन हार्वेस्टर के संचालक की जिम्मेदारी होगी कि कटाई के दौरान फसल अवशेष प्रबंधन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए कटाई करेंगे। यदि वैकल्पिक यंत्र का इस्तेमाल नहीं हुआ तो किसान और कंबाइन हार्वेस्टर के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
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