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धान खरीद: बोरियों की किल्लत बनी समस्या

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फतेहपुर। धान खरीद केंद्रों पर बोरियों की समस्या किसान व केंद्र प्रभारियों के लिए मुसीबत बन गई है। किसान अपने धान को बेचने के लिए महीना भर से क्रय केंद्र में ढेर लगाए हुए हैं। अभी तक तौल नहीं हो सकी है। 10 दिन पहले हुई बारिश में कई किसानों का धान भीग गया था। केंद्र प्रभारी अब उसकी तौल कराने से मना कर रहे हैं। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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समर्थन मूल्य पर धान खरीद करने का भले ही सरकारी मशीनरी दावा कर रही हो, लेकिन इस बार किसी भी संस्था ने केंद्र प्रभारियों को बोरियां नहीं दी है। केंद्र प्रभारियों को खुद बोरियों की व्यवस्था कर धान की खरीद करने को कहा गया है। केंद्र प्रभारियों ने राइस मिलों से बोरियां लेकर धान की खरीद शुरू करा दी है, लेकिन सीमित बोरियां होने की वजह से सही ढंग से तौल नहीं हो पा रही है। तौल कराने के बाद जब बोरियां भर जाती हैं तो केंद्र प्रभारी उन धान की भरी बोरियों को राइस मिल में भेजते हैं। वहां पर बोरियां पहुंचने के बाद मिलर्स फिर खाली बोरियां क्रय केंद्र में भेजते हैं। ऐसे में जिन किसानों ने धान बेचने के लिए क्रय केंद्र में ढेर लगा दिया है। उनको तौल कराने के लिए नंबर लगाना पड़ रहा है। कई किसानों ने अपनी बोरियों में धान की तौल करा दी है। अब उनको बोरियां भी नहीं मिल रही हैं।
असोथर के किसान नीरज सिंह का कहना है कि क्रय केंद्र में बोरियां न होने से धान की तौल सही ढंग से नहीं हो पा रही है। राइस मिल से एक हजार बोरियां मिलती हैं तो वह एक दिन में खत्म हो जाती है। तीन से चार दिन में मिलों से बोरियां आती हैं। ऐसे में हफ्तेभर में तीन से चार किसानों के धान की तौल कराई जाती है।
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असोथर क्षेत्र के चुनका का डेरा के किसान मनोज मिश्रा ने बताया कि एक महीना पहले क्रय केंद्र में धान बेचने के लिए लाए थे। 200 अपनी बोरियों में धान भरा कर तौल करा दी है। वह बोरियां अभी तक नहीं मिली है। क्रय केंद्र में अभी भी तौल कराने के लिए कुछ धान पड़ा हुआ है।
असोथर के किसान मोहम्मद रजी का कहना है कि 10 पहले हुई बारिश में धान भीग गया था। उसमें अंकुरण निकल आए हैं। अब केंद्र प्रभारी उसकी तौल कराने के मना कर रहे हैं। जब कि अधिकारियों की अनदेखी से धान खराब हुआ है। जब क्रय केंद्र में धान लेकर आए थे, तो पूरी तरह से सूखा हुआ था।
रानीपुर गांव के किसान अमन सिंह का कहना है कि धान की खरीद कराने के लिए अधिकारी खुद अनदेखी किए हैं। संस्था जब केंद्र प्रभारियों को बोरियां नहीं देगी तो तौल कराने के बाद धान कहां रखा जाएगा। बोरियों के न होने से किसानों की दिक्कत बढ़ गई है।
डिप्टी आरएमओ रमेश श्रीवास्तव ने बताया कि शासन से इस बार केंद्र प्रभारियों को बोरियां देने के निर्देश जारी नहीं किए गए हैं और न ही बोरियों का बजट दिया गया है। इससे केंद्र प्रभारियों को खुद बोरियां मैनेज कराकर धान की खरीद कराने को कहा गया है। अनुबंध वाली राइस मिलों से बोरियां दी जाती हैं। शुरुआती दौर में कुछ दिक्कत आई थी लेकिन अब खरीद बराबर हो रही है।
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