बकेवर (फतेहपुर)। सिंचाई विभाग ने माइनर की सफाई में लापरवाही बरती तो किसानों ने चंदा लगाकर सिल्ट हटवाई। किंतु अब गेहूं की फसल की सिंचाई के समय माइनर में पानी नहीं आ रहा है। सिंचाई का कोई दूसरा विकल्प न होने से किसान परेशान हैं।
निचली गंगा नहर से निकले 14 किलोमीटर लंबे खजुहा रजबहा से करनपुर, बिजुरी, कंसमीरी और बकेवर समेत पांच माइनर निकली हैं। इन माइनरों से करीब साढ़े तीन हजार बीघा खेती की सिंचाई होती है।
किसानों ने चंदा लगाकर कंसमीरी माइनर की सिल्ट साफ कराई थी।
अब गेहूं की फसल की सिंचाई का समय है लेकिन माइनर में पानी नहीं आ रहा है। सिंचाई का दूसरा विकल्प न होने से फसलें खराब हो रही हैं। इससे किसान परेशान हैं।
नहर में पर्याप्त पानी न होने की वजह से माइनरों में पहुंचने में दिक्कत हो रही है। रोस्टर में दर्ज क्षमता के अनुसार पानी नहर में चलाए जाने के लिए अधीक्षण अभियंता व मुख्य अभियंता को पत्र भेजा गया है।
-- जेपी वर्मा, अधिशासी अभियंता निचली गंगा नहर
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कश्मीरी गांव के किसान प्रताप सिंह यादव ने बताया कि गांव के किसानों से चंदा लेकर जेसीसी से सिल्ट सफाई कराई थी। अब सिंचाई के समय माइनर में पानी नहीं आ रहा है। कोई दूसरा साधन भी नहीं है।
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कश्मीरी गांव के किसान अमित पाल का कहना है कि सिल्ट सफाई में विभाग ने खानापूरी कराई। तब किसानों ने चंदा कर सिल्ट सफा कराई थी। गेहूं फसल की सिंचाई के समय माइनर में पानी नहीं आ रहा था।
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करनपुर गांव के किसान कौशल तिवारी ने कहा कि माइनर के हेड से जगदीशपुर मोड़ तक सिल्ट सफाई कराई जाती है। टेल की ओर माइनर सिल्ट से पट गई है। उसमें पानी नहीं जाता है।
बिजुरी गांव के किसान अजय तिवारी ने कहा कि निचली गंगा नहर में एक महीने से पानी चल रहा है, लेकिन माइनर सूखी पड़ी है। ट्यूबवेल से पाइप जोड़कर पहली सिंचाई तो कर ली लेकिन दोबारा सिंचाई पर संकट है।