महानंद रामलीला कमेटी के तत्वावधान में 16 दिन से चल
रही रामलीला का शुक्रवार को समापन हो गया। अंतिम दिन ज्वालागंज रामलीला
मैदान में प्रभु श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ। इसके बाद सजे रामरथ पर माता
सीता, भाई लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न के साथ सवारी निकली। रास्ते में जगह-जगह
स्वागत हुआ। महिलाओं, युवतियों ने छतों से फूल बरसाए। पीलू तले पहले से
बनाए गए कृत्रिम अयोध्या में जब सवारी पहुंची तो नजारा और भी मनमोहक था।
राम राज्याभिषेक
की तैयारियों को लेकर रामलीला मैदान दुल्हन की तरह सजाया गया। राजदरबार
में प्रभूश्रीराम, मां सीता, भाई लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न के साथ माता
कौशिल्या, कैकई और सुमित्रा भी बैठीं।
कुलगुरु वशिष्ठ ने वैदिक
मंत्रोच्चारण के साथ राज्याभिषेक पूरा कराया। मौजूद महिलाओं ने मंगल गीत
गाए। यह नजारा देखने को हजारों की संख्या में लोग उमड़े। इसके बाद झांकियां
निकलीं।
इसमें आगे भगवान राम का रथ और पीछे हनुमान, विश्वामित्र, गणेश,
शंकर, लक्ष्मीजी, तुलसीदास, सुग्रीव और जामवंत की सवारियां थीं। सभी
बाकरगंज होते हुए पीलू तले तिराहा पहुंची। वहां पहले गणेश वंदना हुई।
इसके
बाद परंपरा के मुताबिक कार्यक्रम संयोजक विनोद गुप्ता व उनकी पत्नी ममता ने
आरती उतारी। फिर तो यह सिलसिला चल पड़ा। घंटों आरती करने वालों की लाइन
लगी रही। समारोह में विभिन्न धर्मगुरु शामिल हुए।
राम राज्याभिषेक मंडल ने
मेला में सहयोग करने वाले चारों हिंदू, मुस्लिम, सिख व इसाई धर्मगुरु,
प्रशासनिक, पुलिस अधिकारी व गणमान्य नागरिकों का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम में राम राज्याभिषेक मंडल के संयोजक विनोद कुमार गुप्ता, अध्यक्ष
मतीन उद्दीन, महामंत्री दिलीप मोदनवाल, कोषाध्यक्ष गिरजा शंकर सोनी, सह
संयोजक अजय बाजपेई, सरंक्षक उमेश तिवारी आदि शामिल रहे।
महानंद रामलीला कमेटी शहर में 199 साल से मेले का आयोजन कर रही है। विजय
दशमी की पूर्व संध्या को गणेश दर्शन और यज्ञ प्रतिष्ठा से यह मेला शुरू
होकर कार्तिक कृष्ण पक्ष की दशमी को समाप्त होने की परंपरा है। शुक्रवार को
परंपरागत तरीके से राम राज्याभिषेक के साथ मेला समाप्त हुआ।