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कपलिंग खुल जाने से दो हिस्सों में बंटी नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस

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फतेहपुर। शहर के रेलवे स्टेशन से 500 मीटर आगे बढ़ते ही दिल्ली से गुवाहाटी जा रही नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस दो हिस्सों में बंट गई। करीब एक किमी तक कई बोगियां बिना इंजन के दौड़ीं। अचानक बोगियों के झटके लेकर रुकने से यात्रियों में दहशत फैल गई। कपलिंग खुल जाने से यह हादसा हुआ। हालांकि एक बड़ी घटना टल गई। तत्काल चालक को अवगत कराकर इंजन को वापस ट्रेन तक ले जाया गया। करीब एक घंटा 20 मिनट तक दिल्ली-हावड़ा रूट की डाउन लाइन बाधित रही।
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दिल्ली-हावड़ा रूट में आनंद विहार से गुवाहाटी जा रही नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस सोमवार दोपहर 3:38 बजे फतेहपुर स्टेशन पर रुकी। यहां से दो मिनट बाद रवाना हुई। जैसे ही स्टेशन से करीब पांच सौ मीटर आगे पहुंची और रफ्तार बढ़ी तो ट्रेन की बोगियों के बीच लगी कपलिंग खुल गई। ट्रेन इंजन के साथ दो बोगियां जुड़ी हुई आगे निकल गईं
और पीछे की बोगियां बिना इंजन के रेलवे ट्रैक पर दौड़ने लगी। कपलर खुलते ही ट्रेन झटके लगने के साथ चलती हुई स्टेशन के करीब दो किमी आगे रुकी। ट्रेन को इंजन से अलग देख यात्रियों के होश उड़ गए। हरिहरगंज ओवर ब्रिज के पास मौजूद लोगों में भी दहशत व्याप्त हो गई। घटना की जानकारी रेलवे प्रशासन को हुई तो उनकी हवाइयां
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उड़ने लगीं। डाउन लाइन में पीछे से आने वाली ट्रेनों को रोका गया। अधिकारियों के निर्देश पर आगे निकले इंजन को वापस लाया गया। शाम को 3.48 बजे नार्थईस्ट एक्सप्रेस की दो हिस्से में बंटी बोगियां खड़ी हो गईं। शाम 5.10 बजे अलग हुई बोगियों को उसी इंजन के सहारे स्टेशन पर वापस लाया गया। कपलिंग जोड़ने और उसकी
जांच करने के लिए कानपुर से टीएसआर अनिल कुमार यादव को बुलाया गया। शाम को 7.50 बजे ट्रेन की बोगियों को इंजन में जोड़ कर सही किया। इसके बाद रात 8.10 बजे ट्रेन को स्टेशन से रवाना किया गया। लूप लाइन पर नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस करीब दो घंटे 22 मिनट खड़ी रही। इस घटना से कालका, मुरी, जोगबनी, महाबोधी, अजीमाबाद एक्सप्रेस पीछे के स्टेशनों पर खड़ी रहीं। इस मौके पर सहायक स्टेशन अधीक्षक चंद्र किशोर, आरपीएफ प्रभारी प्रवीण सिंह, एलपी यादव, हीराचंद्र मीना, जीआरपी प्रभारी अरविंद कुमार सरोज मौजूद रहे।
रेल अधिकारियों की माने तो घटना के दौरान कुछ भी हो सकता था। रेल इंजन के ट्रेन से आगे निकलने पर एवं ट्रेन के गतिशील होने पर ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो सकती थी। ऐसी स्थिति में इंजन निकलने पर ट्रैक क्रासिंग व रैक प्वाइंट पर लाइन बदल सकती थी तथा ट्रेन की बोगियां किसी अन्य ट्रैक पर भी जा सकती थीं। गनीमत रही कि ट्रैक की मेन डाउन लाइन पर ही बोगियां दौड़ती रहीं और वह पलटी नहीं। इससे हादसा टल गया।
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