फतेहपुर। ग्राम रोजगार सेवक संघ के एक दिवसीय धरना प्रदर्शन में प्रतिमाह मानदेय भुगतान न होने से नाराजगी जताई गई। ग्राम रोजगार सेवकों ने शिक्षामित्रों की तरह नियमित करने की मांग की। ग्राम रोजगार सेवक संघ के तत्वावधान में नहर कालोनी में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। जिलाध्यक्ष आदित्य सिंह चौहान ने कहा कि ग्राम रोजगार सेवक दिसंबर 2006 से अब तक पिछले आठ वर्षों से मनरेगा के अंतर्गत संविदा पर ग्राम पंचायतों में काम कर रहे हैं। रोजगार सेवकों को शासनादेशानुसार 3630 रुपये प्रतिमाह मानदेय भुगतान का निर्धारण किया गया, लेकिन इस मद में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध न होने के कारण ग्राम रोजगार सेवकों का निर्धारित मानदेय नहीं मिल रहा है। भुगतान बकाया होने से उनका परिवार भुखमरी की कगार पर है। सरकार द्वारा ग्राम रोजगार सेवकों को राज्य कर्मचारी माना गया है। ऐसे में राज्य सरकार अपने संसाधन से इनक ा मानदेय भुगतान कर सकती है। ग्राम रोजगार सेवकों ने सपा मुखिया से नियमित कर राज्य कर्मचारी दर्जा दिए जाने, पंचायती राज विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों में की जाने वाली सहायक सचिव की भर्ती पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने, ग्राम पंचायत के अधीन कार्यरत ग्राम रोजगार सेवकों से मनरेगा के अतिरिक्त जाब चार्ट में अन्य कार्य जोड़कर योगदान लेने के साथ ग्राम निधि प्रथम की धनराशि से मानदेय भुगतान करने का शासनादेश तत्काल जारी कराने की मांग की है। राज्य सरकार द्वारा अपने स्तर से वित्तीय बजट का प्रावधान करते हुए पिछले 15-20 माह से लंबित बकाया मानदेय का अविलंब भुगतान कराने, स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा मनरेगा को संचालित करने की व्यवस्था को समाप्त करने व नगरीय क्षेत्रों की सीमा में विलीन हो चुके या विलीन होने वाली ग्राम पंचायतों के ग्राम रोजगार सेवकों को रिक्त ग्राम पंचायतों में समायोजित करने का शासनादेश जारी कराए जाने की मांग की। महामंत्री राहुल तिवारी ने कहा कि ग्राम रोजगार सेवकों की समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ तो 26 सितंबर को ग्राम रोजगार सेवक विधान भवन लखनऊ के सामने प्रदर्शन किया जाएगा। धरने में राकेश तिवारी, कमल यादव, शिव प्रताप मौर्य, सरफराज, अजीत प्रताप सिंह, शैलेंद्र श्रीवास्तव, विक्रम सिंह, सज्जन वर्मा, जय शंकर वर्मा, महेंद्र यादव मौजूद रहे।