फतेहपुर। क्या आपको पता है कि गैस का कनेक्शन लेते ही आप 10 लाख तक के बीमाधारक बन जाते हैं। यह सुविधा ऑयल कंपनियों की तरफ से है। जागरूकता की कमी और गैस एजेंसियों से बीमा क्लेम की जानकारी न होने से इसका कनेक्शनधारक लाभ नहीं उठा पाते हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि जानकारी न होने के कारण हादसे के दौरान इसका लाभ नहीं मिल पाता है। बीमा एक्सपायरी डेट के घर तक पहुंचने वाले सिलेंडर पर मिलता है। इसके अलावा अगर रबर खराब है या फिर रेग्यूलेटर में खराबी की वजह से कोई हादसा होता है तो संबंधित गैस कंपनी को बीमा क्लेम देना होता है। इस बात से ज्यादातर उपभोक्ता नावाकिफ होते हैं। शायद यही वजह है कि सिलेंडर से सामने आने वाले हादसों में बीमा क्लेम देने की बात बेमानी बनी हुई है। राम बाबू, प्रवेश कुमार, पवन पांडेय समेत तमाम उपभोक्ता ऐसे किसी क्लेम से अनिभिज्ञ हैं। इनका कहना है कि आईओसी को बीच-बीच में जागरूकता अभियान चला कर एलपीजी कनेक्शन धारकों को जागरूक किया जाना चाहिए। ताकि गैस उपभोक्ता हादसे के दौरान इंडियन आयल कारपोरेशन की इस सुविधा से जुड़ सकें। जिला उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष किशन मेहरोत्रा कहते का आरोप है कि गैस कंपनी से लेकर एजेसिंयां तक इस मसले में खामोश है।
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अब तक केवल दो क्लेम के मामले
जब तब सिलेंडर फटने, रबर से गैस लीेकेज होने और रेग्यूलेटर की खराबी से आग लगने के मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन बीमा क्लेम देने अथवा लेने के मामले नाममात्र के भी उभर कर नहीं आ पाते हैं। ललिता गैस एजेंसी के प्रबंधक बृजेंद्र सिंह व इंडेन गैस एजेंसी के प्रबंधक बाबू लाल बताते हैं कि एजेंसी के संचालन से अब तक उनके यहां क्लेम के एक-एक ही मामले सामने आ सके हैं।
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आसान नहीं क्लेम की राह
इंडियन आयल कारपोरेशन की ओर से सिलेंडर प्रयोग के दौरान होने वाले हादसों में हादसे की श्रेणी के लिहाज से एक लाख से 10 लाख रुपए तक का बीमा क्लेम दिए जाने का फरमान है। इसकी प्रक्रिया इतनी पेचीदा है कि क्लेम का मामला हाशिए पर चला जाता है। ललिता गैंस एजेंसी के प्रबंधक बृजेंद्र सिंह बताते हैं कि क्लेम करने पर आईओसी और दमकल की टीम जांच के लिए आती हैं। जांच के बाद वह अपनी रिपोर्ट के आधार पर क्लेम की दिशा में काम करती हैं।