फतेहपुर। यह कैसा न्याय: शहर के 24 हजार घरों में पीने के पानी के कनेक्शन नहीं हैं, लेकिन बिना कनेक्शन के इन परिवारों को जलकर की अदायगी करनी पड़ रही है। शहर में कुल 38 हजार रिहायशी मकान हैं, जिनमें नगर पालिका परिषद ने 14 हजार 650 घरों में पेय जलापूर्ति कनेक्शन दे रखे हैं। इसके बावजूद नगर पालिका परिषद शत प्रतिशत मकानों से हर साल न्यूनतम 240 रुपये जलकर की वसूली करती है।
नगर पालिका क्षेत्र में एक लाख 90 हजार की आबादी, शहर में बने 38 हजार रिहायशी मकानों में रहती है। इन मकानों में सिर्फ 14 हजार में नगर पालिका परिषद ने जलापूर्ति के कनेक्शन आवंटित कर रखे हैं। इनके अलावा शेष 23350 ऐसे मकान हैं, जहां पर जलापूर्ति के कनेक्शन ही नहीं है। इसके बावजूद नगर पालिका परिषद कनेक्शन विहीन मकानों से भी गृहकर के साथ जलकर की वसूली करता है। नगर पालिका परिषद से इसके लिए 240 रुपये वार्षिक प्रत्येक मकान से जलकर का मानक निर्धारित कर रखा है।
खास बात तो यह है कि शहर की बड़ी आबादी वाले मोहल्लों में लोग पेयजल का कनेक्शन लेना भी चाहें तो नगर पालिका दे ही नहीं सकती हैं, क्योंकि इन मोहल्लों में पाइप लाइन ही नहीं बिछी है। इसके बावजूद नगर पालिका परिषद जलकर की वसूली करती है।
जलकल के अवर अभियंता गौरीशंकर पटेल का कहना है कि अगर किसी भी मकान से छह सौ फीट की दूरी से पाइप लाइन गुजरती है तो संबंधित गृहस्वामी से जलकर की वसूली का प्रावधान है। जरूरी नहीं है कि संबंधित मकान में जलापूर्ति का कनेक्शन जुड़ा हो। ऐसी हालत में शहर के अधिकांश मकान जलकर के दायरे में आते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि शहर में 14 हजार 650 घरों में ही जलापूर्ति के कनेक्शन आवंटित हैं।