फतेहपुर। घर-घर मरीज तो घर-घर डॉक्टर। जिले में पिछले डेढ़ माह से कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। पीड़ितों को सौ फीसदी राहत का छलावा देकर शरीर के किसी भी हिस्से में हड्डियों से संबंधित समस्या का इलाज विदेशी दर्द निवारक मशीनों से किया जा रहा है। फौरी राहत के बाद मरीज भी इस तरह के इलाज के दूरगामी परिणामों से बेखबर हो चल देते हैं। जिलाधिकारी की नाक के नीचे बगैर किसी पंजीकरण के शेरा जेम नाम से हड्डी रोगियों का इलाज किया जा रहा है। इस कथित क्लीनिक में प्रतिदिन करीब पांच सौ रोगियों का इलाज किया जाता है। सुबह से शाम तक रोगियों और तीमारदारों की खासी भीड़ जुटने के बावजूद सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। तीस बेडों की कथित क्लीनिक को जेम के नाम चला रहे हैं। रोजाना आधे घंटे के मुफ्त इलाज से रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है।
जिला कचहरी के पीछे वाले गेट के सामने उत्सव मैरिज हाल में साउथ कोरिया की शेरा जेम नामक संस्था ने अपनी मशीनें लगा रखी हैं। मशीनों के माध्यम से शरीर के किसी भी अंग में हड्डियों के दर्द का इलाज 17 जून से किया जा रहा है। जेम में टोकेन के हिसाब से एक साथ तीस रोगियों को लिटाकर मशीनों के माध्यम से सेंकाई की जाती है। आधा घंटे बाद अगली टोकेन की क्रम संख्या के आधार दूसरे मरीजों बुलाया जाता है। हाल यह है कि जेम स्थल पर भोर चार बजे से रोगियों की भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है। लोग अपने दो चादरों से भरा बैग दरवाजे से लाइन के रूप में रखना शुरू कर देते हैं और जेम खुलने के समय तक बैगों की लंबी लाइन लग जाती है। इसके बाद बैगों के आधार पर रोगी को जेम कर्मी टोकेन देकर विस्तरों का आवंटन करते हैं। इसके बाद अप्रशिक्षित कर्मचारी रोगियों में मशीनें से सेंकाई करते हैं। यह सिलसिला शाम सात बजे तक चलता है।
शेरा जेम का मेडिकल से लेनादेना नहीं- संचालक
केंद्र संचालक पूजा का कहना है कि यह जेम सेंटर है। इस तरह के सेंटर कानपुर के शुक्लागंज समेत महानगरों में बड़ी तादाद में संचालित हो रहे हैं। यहां मशीनों के माध्यम से पूरी तरह से मुफ्त इलाज किया जाता है। इलाज के साथ कंपनी इन मशीनों की बिक्री करने का भी काम करती है। उनका कहना है कि उनका पूरा स्टाफ नॉन मेडिकल है। वह स्वयं भी डाक्टर नहीं हैं। शेरा जेम का मेडिकल से कोई लेना देना नहीं है। इसी लिए जहां भी उनके जेम चल रहे हैं, कहीं भी स्वास्थ्य विभाग या अन्य किसी विभाग के किसी तरह का कोई प्रमाण पत्र नहीं लिए गए हैं।
भोर से नंबर लेने
के लिए इंतजार
फतेहपुर। दिन शुक्रवार। समय- सुबह के 8 बजे। स्थान जिला कचहरी के पीछे वाले गेट के सामने उत्सव मैरिज हाल। सड़क के दोनों ओर दो पहिया वाहनों की लाइन लगी है। सैकड़ों के तादाद में महिला व पुरुषों की भीड़ लगी है। सुबह के आठ बजे शेरा जेम के बाहर रोगियों की खासी भीड़ है। बार-बार लोगों की नजरेें पत्थरकटा चौराहे की ओर उठ रही हैं। शायद, सभी को कानपुर से अप-डाउन करने वाले जेम संचालकों का इंतजार है। जेम में काम करने वाले कुछ युवक और युवतियां आ चुकी हैं। उन्हें भीड़ के सवालों से जूझना पड़ रहा है। ठीक घंटे भर बाद दो युवकों का आगमन। इसके बाद क्रम से तीस रोगियों को टोकेन बांटे गए।
पूछने पर पता चला कि मैम (संचालक) पूजा शुक्रवार को कानपुर से विलंब से आएंगी। अपरान्ह 1. 25 बजे खूबसूरत कपड़ों से सजी कंधे में कीमती बैग डाले एक युवती ने प्रवेश किया। संवाददाता ने अपना परिचय देकर जानकारी चाही। करीब दस मिनट तक बातचीत के बाद उन्होंने इसे शेरा जेम बताकर मुफ्त इलाज का उद्देश्य मशीनों की बिक्री करना बताया। एक मशीन की कीमत एक लाख 35 हजार तथा दूसरी मशीन की कीमत 70 हजार बताते हुए कहा कि अभी तक जिले में एक भी मशीन की बिक्री नहीं हुई है। उन्होंने कानपुर में दस सेंटर चलने की जानकारी भी दी।
कोट
फतेहपुर। मशीनों के माध्यम से थेरेपी की जा रही है, तो क्लीनिक का स्वास्थ्य विभाग में पंजीयन आवश्यक है। डा. एके सिंह- सीनियर फिजीशियन जिला क्षय रोग केंद्र
कोट
फतेहपुर। बिना स्वास्थ्य विभाग में पंजीयन के थेरेपी चलाना अवैध है। मशीनें लगाकर थेरेपी या सेंकाई करके इलाज किया जा रहा है, तो ऐसे में संचालक के खिलाफ कार्रवाई बन रही है। मामले की जांच कराई जाएगी।
आदित्य मिश्रा सीएमओ (फतेहपुर)