महिला प्रधान समेत छह पर रिश्वत के मामले में केस दर्ज होगा
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- रिश्वत देने के आरोप में तीन लाभार्थी भी नामजद होंगे
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना में रिश्वत के आरोपों की जांच के बाद डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने महिला ग्राम प्रधान समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर के निर्देश दिए हैं। कार्रवाई की जद मं आने वालों में आवास का आवेदन करने वाले तीन लाभार्थी भी हैं। इन पर रिश्वत देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का केस चलेगा।
मामला हंसवा विकास खंड के नरैनी गांव का है। यहां के ग्रामीण धनंजय दीक्षित ने ग्राम प्रधान संतोष कुमारी के प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभार्थियों से वसूली किए जाने की शिकायत की थी। प्रकरण की पड़ताल के लिए डीएम ने उपायुक्त स्वत: रोजगार सुखराज बंधु और पीडी डीआरडीए ए.के निगम के साथ बीडीओ हंसवा की जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी ने जांच के दौरान शिकायत को सही पाया था और रिपोर्ट दी थी कि ग्राम प्रधान संतोष कुमारी, उनके पुत्र राघवेंद्र उर्फ लाला सिंह और भतीजे गौरव ग्रामीणों से आवास के नाम पर बीस-बीस हजार रुपये की वसूली कर रहे हैं। इस मामले में जिला प्रशासन ने कार्रवाई से पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता से विधिक राय ली तो उन्होंने रिश्वत लेना और देना दोनों को ही अपराध बताया। लिहाजा डीएम ने आवासीय योजना में लाभार्थियों से रिश्वत लेने के आरोप में ग्राम प्रधान संतोष कुमारी, उनके पुत्र राघवेंद्र उर्फ लाला सिंह और भतीजे गौरव पर एफआईआर कराने का आदेश दिए। साथ ही रिश्वत देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के आरोप में लाभार्थी राजरानी, राम किशुन और फूलचंद्र पर भी एफआईआर कराने के आदेश दे दिए। डीएम ने दोनों के खिलाफ एफआईआर कराने की जिम्मेदारी डीआरडीए के पीडी अशोक कुमार निगम को दी है।
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पांच साल सजा का प्रावधान
फौजदारी मामलों के विशेषज्ञ अजीत सिंह राठौर ने बताया कि ऐसे मामले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आते हैं। अधिनियम के सेक्शन 13 के तहत इसमें एफआईआर दर्ज कराई जाती है। आरोप सिद्ध होने पर आरोपियों को पांच साल की सजा का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि यह गैर जमानती अपराध है। इसलिए इसमें जमानत नहीं मिलती।