नगर पालिका चेयरमैन और ईओ में ठनी
बिंदकी। नगर पालिका परिषद की चेयरमैन नीलम सोनी और ईओ अनीता शुक्ला में ठन गई है। कई बार मांगने के बाद भी पत्रावली न मिलने पर ईओ ने रिपोर्ट एडीएम को भेज दी है।
नगर पालिका सभासदों की शिकायत पर चेयरमैन नीलम सोनी की जांच कराई गई थी। उन्हें दोषी मानते हुए अप्रैल 2016 में शासन ने वित्तीय पावर छीनकर एसडीएम को दे दिए थे।
बाद में चेयरमैन ने सपा में शामिल होकर अपने वित्तीय अधिकार शासन से अक्तूबर 2016 में बहाल करा लिए। इसके बाद से कई बिंदुओं पर चेयरमैन और ईओ के बीच दूरियां बढ़ती रहीं। एडीएम को रिपोर्ट भेज देने के बाद तल्खी साफ हो गई है। ईओ अनीता शुक्ला ने बताया कि चेयरमैन दाखिल खारिज की 36, मानचित्र की 29, पक्की दुकानों की नीलामी की 40, कर विभाग, गुमटी पंजीयन रजिस्टर सहित महत्वपूर्ण अभिलेख अपने यहां उठा ले गई हैं। इसकी रिपोर्ट अपर जिलाधिकारी को भेजी गई है।
- घर में रखी महत्वपूर्ण फाइलों की भेजी रिपोर्ट, जांच रिपोर्ट में छिने थे वित्तीय अधिकार
डीजल के सवा लाख का भुगतान नहीं
बिंदकी। नगर पालिका परिषद की चेयरमैन और ईओ के बीच तनातनी का दंश पेट्रोल पंप मालिक को झेलना पड़ रहा है। ट्रैक्टर, फागिंग मशीन, जनरेटर में लगने वाले डीजल का भुगतान तीन माह से नहीं किया गया है। ऐसे में पेट्रोल पंप मालिक ने डीजल देना बंद कर दिया था। इससे कई दिन तक नगर का कूड़ा नहीं उठ सका था। ईओ की शिकायत पर एसडीएम एसपी सिंह ने अपने क्रेडिट पर डीजल दिलाने के साथ ही चेयरमैन से भुगतान बिल पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा। इसके बाद डीजल मिलना शुरू हुआ।
क्या कहती हैं चेयरमैन
चेयरमैन नीलम सोनी का कहना है कि ईओ व कर्मचारी विकास कार्यों में सहयोग नहीं कर रहे हैं। डीजल खर्च का ब्योरा न मिलने के कारण भुगतान बिल पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। फर्जी लेबर का मस्टर रोल लगाया जा रहा है। फर्जी भुगतान संभव नहीं है। फाइलें मेरे यहां होंगी तो नगर पालिका में डिस्पैच रिकार्ड होगा। इसे देखा जा सकता है। मेरी इच्छा है कि डीएम मध्यस्थता कर दोनों की जांच करा लें।