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गेहूं से बना दिया एक रुपये का सिक्का

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नवीन सैनी
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फतेहपुर। सराय धरमपुर गांव के शैलेंद्र उत्तम ने ऐसा कर दिखाया जो अद्भुत और अकल्पनीय है। इस युवा ने दो क्विंटल 10 किलो गेहूं के दाने से एक रुपये का सिक्का बनाया है। सिक्का बनाने में उसे डेढ़ महीने लगे हैं। पांच फुट लंबा यह सिक्का इलाके में चर्चा का विषय बना है।

जहानाबाद थाना क्षेत्र के छोटे से गांव सराय धरमपुर में किसान परिवार में जन्मे शैलेंद्र उत्तम ने जिस लगन और इच्छाशक्ति के सिक्के में रंग भरे हैं। वह काबिलेतारीफ है। काफी वक्त देकर बनाए गए इस सिक्के को थर्माकोल के सहारे गढ़ा गया है। सिक्के के हेड में शेर का निशान और उसके दोनों छोर पर हिंदी और अंग्रेजी में भारत लिखा है।
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बकौल शैलेंद्र सन 1976 का यह सिक्का डेढ़ महीने से बना रहे थे, जो अब बनकर तैयार हो पाया है। इसमें गेहूं के साथ क्रेक बांड ग्रेनाइट का इस्तेमाल किया गया है। यह पत्थर में फंसी हुई आकृति बनाने के काम आता है। इसमेें कलर नहीं मिलाना होता है। यह पानी की तरह तरल होता है। उन्होंने थर्माकोल में सबसे पहले आकृति तैयार की। इसके बाद गेहूं के एक-एक दाने को चिपका कर यह आकृति तैयार की है।

शुरुआत में कई बार ऐेसे मौके आए जब लोगों ने इसे बेकार का काम कहा, पर जब आकृति ने रूप लिया तो सभी कायल हो गए। ग्रेजुएट शैलेंद्र का कहना है कि शुरू से ही उनका रुझान कला के प्रति था। उन्हाेंने इससे पहले गांव के ब्रह्मदेव मंदिर में तीन फिट की शंकर व पार्वती की मूर्ति खुद बनाकर रखी है।

उन्होंने बताया कि अचानक ख्याल आया कि सिक्के में गेहूं की बाली क्यों बनी होती है। उन्होंने इसके जरिए किसान और भारत की अर्थव्यवस्था के सामंजस्य को दर्शाया है। उनका मानना है कि अगर किसान के पास गेहूं नहीं है तो भारत की अर्थव्यवस्था जीरो है। उनकी तमन्ना इस सिक्के को गिनीज बुक में दर्ज कराने की है।
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शैलेंद्र का कहना है कि महोबा जिले के कबरई कस्बे के रहने वाले मूर्तिकार लक्ष्मी उनके गुरु रहे। वह इस दुनिया में नहीं हैं। शैलेंद्र की पत्नी अंजू उत्तम लखनऊ विकास प्राधिकरण में क्लर्क हैं।

गेहूं से बनाया एक रुपये का सिक्का
सराय धरमपुर के शैलेंद्र ने बनाया अद्भुत रिकार्ड
बनाने में खप गया दो कुंतल 10 किलो गेहूं
सिक्कों में गेहूं की बाली देखकर उपजा था ख्याल
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