अल्ट्रासाउंड कराने के लिए दूर-दराज से आए लोग
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सदर अस्पताल की अल्ट्रासाउंड सेवा ताले में कैद होकर रह गई है। अल्ट्रासाउंड कराने आने वाले जरूरतमंदों को 27 दिन से निराशा हाथ लग रही है। शुक्रवार को दूरदराज से आने वाले मरीज अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर इंतजार करने के बाद रेडियोलाजिस्ट के न आने पर लौटने को मजबूर हो गए। अस्पताल सूत्रों की माने तो अक्सर बनने वाले ऐसे हालात हाल फिलहाल खत्म होते दिखाई नहीं दे रहे हैं।
वैसे सदर अस्पताल में दो रेडियोलाजिस्ट की तैनाती है। इसके बावजूद भी रेडियोलॉजी विभाग की सेवाएं समुचित तरीके से लोगों को नहीं मिल पा रही हैं। लोगों का कहना है कि एक साथ दोनों रेडियोलॉजिस्ट को कभी काम करते नहीं देखा। ‘कभी हम, कभी तुम’ की तर्ज पर सेवाएं दे रहे दोनों रेडियोलॉजिस्ट की इस कार्यशैली से काम प्रभावित हो रहा है।
इस विभाग की महीने भर की सेवाओं पर गौर फरमाएं तो पहले से तैनात रेडियोलॉजिस्ट डॉ. मनु गोपाल महीने भर से गायब हैं। दूसरे रेडियोलाजिस्ट डॉ. बीपी सिंह ने 23 अप्रैल तक अपनी सेवाएं दी। उनका 28 अप्रैल को एक्सीडेंट हो गया। जिसके बाद से वह मेडिकल लीव पर चल रहे हैं।
इधर, आएदिन लौट रहे जरूरतमंद शुक्रवार को भी रेडियोलॉजिस्ट के न होने पर सरकारी सेवा का लाभ उठाने में नाकाम रहे। हुसैनगंज की शबीना बेगम इनमें से एक रहीं। उन्होंने रेडियोलॉजी विभाग के कर्मचारियों से जानकारी मांगी तो उन्हें अगले सप्ताह आने को कहा गया। यह सुनकर सुबह आठ बजे से अल्ट्रासाउंड कक्ष का ताला खुलने का इंतजार कर रहे मसवानी मोहल्ले के राजू सिंह सरकारी सेवा का मोह छोड़कर प्राइवेट अल्ट्रासाउंड कराने को अस्पताल कैंपस छोड़ गए।
सदर अस्पताल के रेडियोलाजी विभाग में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद होने से इस अस्पताल में भर्ती रोगियों को जिला महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष में भेजा जा रहा है। जिला महिला अस्पताल के रेडियोलाजिस्ट डॉ. निरंजन कुमार कहते हैं कि रोजाना कम से कम 50 से ऊपर अल्ट्रासाउंड तो अकेले महिलाओं के ही हो रहे हैं।
समयाभाव व विद्युत आपूर्ति के बीच में ब्रेक हो जाने से दिक्कतें तो आ रही हैं लेकिन सीएमएस का आदेश भी तो टाला नहीं जा सकता है। सीएमएस सदर अस्पताल डॉ. बीपी सिंह ने कहा कि एक्सीडेंट होने से मेडिकल लीव पर हैं। डॉ. मनु गोपाल पर तमाम चेतावनी का असर नहीं पड़ रहा है। शासन से कई बार हिदायत भी उन्हें मिल चुकी है। एक बार फिर लिखापढ़ी की जाएगी।