फतेहपुर। शहर के सथरियांव में 17 साल से 216 आवासों वाली काशीराम कालोनी लावारिस पड़ी है। बिजली, पानी और सड़क की व्यवस्था न होने के कारण कालोनी का आवंटन अटका पड़ा है। वर्तमान में कालोनी आरजकतत्वों का अड्डा बनी है। नीचे के तल में लोग पालतू मवेशी बांध रहे हैं। कालोनी के मकान भी देखरेख के अभाव में जर्जर होने लगे हैं।
बसपा सरकार में 2008 में चार स्थानों में कांशीराम कालोनी का निर्माण हुआ था। इनमें अस्ती, महर्षि और गडरियन पुरवा में बनी काशीराम कालोनियों का आवंटन हो चुका था, लेकिन सथरियांव कालोनी में बिजली कनेक्शन, जलापूर्ति व्यवस्था के साथ सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। आवासों का निर्माण कराने के बाद ठेकेदार छोड़कर भाग निकला। ऐसे में इनका आवंटन अटक हुआ है।
डूडा ने कालोनी नगर पालिका को हस्तांतरित कर दिया है। इसके बावजूद अभी तक कालोनी लावारिस हालत में है। खास बात यह है कि शहर में हजारों जरूरतमंद और पात्र परिवार झोपड़ पट्टी में रात गुजार रहे हैं, लेकिन प्रशासन ऐसे गरीबों का लावारिस पड़े आवासों का आवंटन करने से कतरा रहा है।
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20 साल से अधबने पड़े आसरा योजना के आवास
डूडा ने आसरा योजना के तहत 2004 में कानपुर प्रयागराज हाईवे किनारे आवासों का निर्माण शुरू कराया था। दूसरी किस्त न मिलने के कारण इन आवासों का निर्माण 10 साल बंद रहा। दूसरी किस्त मिलने के बाद काम शुरू हुआ, लेकिन शासन ने अब तक इस्टीमेट स्वीकृत नहीं किया। ऐसे में योजना के 96 आवास अधबने पड़े हैं।
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सथरियांव कांशीराम कालोनी में बिजली, पानी और सड़क निर्माण के लिए शासन से बजट मांगा गया है। बजट मिलने के बाद व्यवस्थाएं दुरुस्त कराकर कालोनी पात्रों का आवंटित कर दी जाएंगी। आसरा योजना के आवासों का निर्माण पूरा कराने के लिए भी बजट मांगा गया है। - समीर कुमार कश्यप, कार्यवाहक पीओ, डूडा
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