खागा(फतेहपुर)। पशु तस्करी के मामले में प्रयागराज एसटीएफ की ओर से की जा रही जांच को लेकर जनपद में हड़कंप मचा हुआ है। खबर है कि खागा कोतवाली एसटीएफ की लिस्ट में शामिल है। यहां कुछ पुलिसकर्मी ऐसे हैं जिनकी तैनाती कोतवाली में बताई जा रही है, लेकिन ड्यूटी चौकियों में कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक मलिझगांव चौकी में एक पुलिसकर्मी इस प्रकरण में चिह्नित किया गया है। उसकी तैनाती कोतवाली में बताई जा रही है। यह पुलिसकर्मी इस धंधे के रिस्क को समझते हुए खुद सड़क पर नहीं आता है। यह प्राइवेट व्यक्ति जो आमतौर पर एक लुंगी और बनियान पहनकर चौकी के पास देखा जाता है, से पशु लदे वाहनों से वसूली कराता है। अगर कोई बिना रुपये दिए निकलता है तो पुलिसकर्मी अपने चेहरे पर गमछा बांधकर उसे बाइक से दौड़ाकर टोल प्लाजा तक पकड़ लेता है।
इसी तरह से महिंचा मंदिर चौकी में तैनात एक पुलिसकर्मी इस पूरे रैकेट का सबसे बड़ा मास्टर माइंड बताया जा रहा है। यह कर्मचारी करीब चार साल से हाईवे के थाने और चौकियों पर तैनात रहकर इस गिरोह को पोष रहा है। हाईवे से प्रतिबंधित व गैर प्रतिबंधित पशुओं से लदे वाहनों का आवागमन होता है। जांच प्रकरण की भनक लगने के बाद हाईवे के एक थाना पुलिस की ओर से धरपकड़ जरूर शुरू कर दी गई है। कोतवाल सुरेश चंद्र ओमहरे का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है। छानबीन कर कार्रवाई की जाएगी।
पशु क्रूरता अधिनियम के नाम पर वसूली
हाईवे से प्रतिबंधित के साथ ही गैर प्रतिबंधित मवेशियों की तस्करी हो रही है। इस कारोबार में पुलिस की सबसे अधिक कमाई है। वाहनों में गैर प्रतिबंधित मवेशियों को ठूंसकर लादा जाता है। पुलिस तस्करों को पशु क्रूरता अधिनियम का भय
दिखाकर वसूली करती है। अफसरों के दबाव में गाड़ी पकड़ी गई तो पहले से तय सौदे के मुताबिक पुलिस तस्कर के ही व्यक्ति, जो पशु पालक के भेष में आते हैं, मवेशी सौंप दिए जाते हैं। गाड़ी भी देर-सबेर छोड़ दी जाती है।
कोतवाली में तैनाती और चौकी में ड्यूटी
प्राइवेट व्यक्ति से कराई जा रही वसूली, पैसा नहीं देने पर बाइक से दौड़ाता है पुलिसकर्मी